
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। मध्य प्रदेश के रतलाम (Ratlam) जिले के नामली थाना क्षेत्र के ग्राम नेगड़दा निवासी एक परिवार ने अपने 23 वर्षीय युवक जितेन्द्र की मौत को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए रतलाम एसपी अमित कुमार (Ratlam SP Amit Kumar) को लिखित शिकायत सौंपी है। मृतक की मां पेपाबाई ने गंभीर आरोप लगाया है कि उनके पुत्र की मौत आत्महत्या नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या हो सकती है, लेकिन नामली पुलिस निष्पक्ष जांच नहीं कर मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। मृतक के मां ने अपने बेटे की मौत की अब शिकायत में मजिस्ट्रियल या सीबीआई (CBI) जांच की मांग की है।
बता दें कि ग्राम नेगड़दा निवासी पेपाबाई के पुत्र जितेन्द्र की मृत्यु 12 मई 2026 को हुई थी। नामली थाना पुलिस ने इसे आत्महत्या मानकर मार्ग दर्ज किया था। परिवार का कहना है कि शुरुआत से ही उन्हें यह विश्वास नहीं था कि जितेन्द्र आत्महत्या कर सकता है।

मौत से पहले रिश्तेदार के साथ था युवक
परिवार ने अपनी शिकायत में बताया कि 11 मई 2026 की रात जितेन्द्र गांव में एक धार्मिक कार्यक्रम की पत्रिका बांटने गया था। आरोप है कि विक्रम उसे अपने साथ लेकर गया था। शिकायत के मुताबिक, दोनों ने रात करीब 9 बजे मृतक के ससुराल पक्ष में पत्रिका दी, वहीं भोजन किया और रात लगभग 10.30 बजे साथ में गांव लौटने निकले। अगली सुबह जितेन्द्र का शव घर के पीछे एक पेड़ पर फंदे से लटका मिला। परिवार का कहना है कि मृतक को अंतिम बार जीवित अवस्था में विक्रम के साथ देखा गया था, इसके बावजूद पुलिस ने अभी तक विक्रम से पूछताछ करना भी मुनासिब नहीं समझा।
जमीन विवाद को बताया संदेह की वजह
शिकायत में दूसरा बड़ा कारण जमीन विवाद को बताया गया है। परिवार के अनुसार, ग्राम सिंगाखेड़ी स्थित उनकी कृषि भूमि का कुछ हिस्सा अद्धबटाई पर दिया गया था। मृतक जितेन्द्र द्वारा कब्जा वापस मांगने पर विवाद पैदा हुआ। शिकायत में आरोप लगाया गया कि संबंधित व्यक्ति ने जमीन लौटाने से इनकार किया और जान से मारने की धमकी भी दी थी। परिवार का दावा है कि इस विवाद की बातचीत का ऑडियो रिकॉर्ड भी मौजूद है। शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि जमीन के विवाद के चलते साजिश रचकर उनके बेटे की हत्या की गई है।
एक अन्य भूमि विवाद का भी किया जिक्र
परिवार ने शिकायत में तीसरे व्यक्ति पर भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मृतक जितेन्द्र की मौत से करीब 10–12 दिन पहले गांव की एक अन्य कृषि भूमि को लेकर विवाद हुआ था। मृतक ने स्वयं घर आकर इस विवाद की जानकारी दी थी। शिकायतकर्ता ने आशंका व्यक्त की कि जमीन विवाद में शामिल लोगों की आपसी मिलीभगत से उनके बेटे की हत्या को अंजाम दिया है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी उठाए सवाल
शिकायत में पोस्टमार्टम प्रक्रिया और रिपोर्ट को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। परिवार का दावा है कि पुलिस द्वारा दी गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में समय और तारीख संबंधी विसंगतियां हैं। उनका कहना है कि रिपोर्ट में दर्ज समय के अनुसार पोस्टमार्टम ऐसे समय दर्शाया गया है, जब मृतक जीवित था। इसके अलावा परिवार ने आरोप लगाया कि मृतक के गले के पीछे गहरे काले निशान थे, जो सामान्य फांसी के मामलों से मेल नहीं खाते। परिवार के पास मौजूद फोटो के आधार पर दावा किया गया कि शव की स्थिति और शरीर पर मौजूद निशान संदेह पैदा करते हैं।
मोबाइल और कॉल डिटेल जांच नहीं होने का आरोप
शिकायत में पुलिस जांच पर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने मृतक और उसके साथ अंतिम समय में मौजूद व्यक्ति के मोबाइल फोन की जब्ती नहीं की, न ही कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), व्हाट्सएप चैट, मैसेज या अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की गई। परिवार का कहना है कि यदि मोबाइल रिकॉर्ड और बातचीत की जांच की जाए तो घटना की सच्चाई सामने आ सकती है।
मेरा बेटा आत्महत्या नहीं कर सकता- मां
मृतक की मां पेपाबाई ने रतलाम एसपी अमित कुमार (Ratlam SP Amit Kumar) को बताया कि उनका पुत्र पूरी तरह स्वस्थ था, खेती और चौकीदारी का काम कर परिवार का भरण-पोषण करता था। उसे किसी प्रकार का मानसिक तनाव, आर्थिक परेशानी या पारिवारिक विवाद नहीं था। ऐसे में परिवार को पूरा विश्वास है कि वह आत्महत्या नहीं कर सकता। परिवार ने रतलाम एसपी अमित कुमार से निष्पक्ष जांच कराने के लिए केस की मजिस्ट्रियल जांच करवाने तथा आवश्यकता पड़ने पर सीबीआई को जांच सौंपने की मांग की है, ताकि युवक की मौत की वास्तविक वजह सामने आ सके और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई हो सके।
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