
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। रतलाम (Ratlam) हर के मध्य, कॉन्वेंट स्कूल के समीप गली में स्थित हजरत ख्वाजा खुदा सैयद दादाजी (शहीद) की प्रसिद्ध दरगाह शरीफ परिसर में 422वां दो दिवसीय सालाना उर्स धार्मिक आस्था, गंगा-जमुनी तहजीब और हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल के रूप में मनाया जा रहा है। उर्स के दूसरे दिन 20 मई की रात 9 बजे से महफिल-ए-सिमा (कव्वाली) का आयोजन होगा। इसमें देश के मशहूर कव्वाल हाजी मुकर्रम अली वारसी तथा पगड़ी बंद कव्वाल वफा फारूख हाशमी एंड पार्टी (मंदसौर) अपनी प्रस्तुतियों से सूफियाना रंग बिखेरेंगे। आयोजन में बड़ी संख्या में संगीत और सूफी परंपरा से जुड़े लोग शामिल होंगे।
वर्षों पुरानी इस ऐतिहासिक दरगाह पर हर समुदाय के लोग श्रद्धा के साथ पहुंचकर जियारत करते हैं और अमन-चैन की दुआ मांगते हैं। उर्स का आगाज 19 मई 2026 की सुबह 6 बजे परचम कुशाई के साथ हुआ। इसके बाद सुबह 8 बजे कुरआन ख्वानी का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में जायरीन और श्रद्धालुओं ने शामिल होकर दरगाह पर हाजिरी दी। पूरे परिसर को आकर्षक विद्युत सज्जा से सजाया गया है, जिससे दरगाह की रौनक देखते ही बन रही है। दरगाह कमेटी के सदर मंसूर अली पटोदी और कोषाध्यक्ष खुर्शीद आलम ने बताया कि उर्स के तहत 19 मई की शाम शेरानीपुरा स्थित हजरात दादा बदीउद्दीन जिंदाशाह मदार के चिल्ला-ए-मुबारक से चादर शरीफ का भव्य जुलूस निकाला गया। यह जुलूस शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए मित्र निवासी कॉलोनी स्थित दरगाह शरीफ पहुंचा, जहां चादर पेश कर विशेष दुआ मांगी।

शुद्ध शाकाहारी व्यवस्था बनी विशेष पहचान
दरगाह की एक खास पहचान यहां की शुद्ध शाकाहारी व्यवस्था भी है, जो सर्वधर्म समभाव और सामाजिक सौहार्द का संदेश देती है। यही कारण है कि उर्स में सभी वर्गों और समुदायों के लोग बिना किसी भेदभाव के शामिल होकर सेवा, श्रद्धा और भाईचारे की परंपरा को आगे बढ़ाते हैं। दरगाह कमेटी के सचिव सैयद साजिद अली, नायाब सदर सैयाद मनसब अली, नायाब सेक्रेटरी दीपक नागोरी, नायाब खंजाची शाहीद अली, अफजल हुसैन शाह, अनवर शेरानी, मांगीलाल जैन सहित कमेटी सदस्यों ने शहरवासियों और जायरीन से उर्स में बुधवार रात होने वाली भव्य कव्वाली के आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।
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