


रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। मध्य प्रदेश के रतलाम (Ratlam) शहर के डाट की पुल सहित पटरी पार लक्ष्मणपुरा, गांधीनगर, बिरियाखेड़ी और डोंगरेनगर क्षेत्र में अवैध और ब्लैक में शराब बिक्री का मामला सामने आने के बाद आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि इन क्षेत्रों में माफिया बेखौफ होकर अवैध शराब की बिक्री कर रहे हैं। इससे न केवल शराब कारोबार से जुड़े नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही, बल्कि शासन के राजस्व को भी नुकसान पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है।



मामले की गंभीरता इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों तक सूचना पहुंचाए जाने की बात सामने आई है। इसके बावजूद मौके पर तत्काल जांच या कार्रवाई नहीं होने के आरोप हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि आबकारी विभाग को अवैध शराब बिक्री की सूचना मिलती है तो उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी मौके पर पहुंचकर तथ्यों की जांच करना और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करना नहीं है?



सूचना के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?
डाट की पुल क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री की जानकारी जिम्मेदारों तक पहुंचाने के बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं होने के आरोपों ने विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर अवैध शराब की शिकायत को गंभीर मानते हुए संबंधित क्षेत्र में जांच, स्टॉक और बिक्री की वैधता की पड़ताल तथा आवश्यकता होने पर जब्ती जैसी कार्रवाई की जाती है। लेकिन यहां सवाल यह है कि सूचना मिलने के बाद विभाग ने क्या कदम उठाए? क्या मौके पर जांच की गई? यदि जांच हुई तो उसका निष्कर्ष क्या रहा? और यदि जांच नहीं हुई तो शिकायत को नजरअंदाज करने का कारण क्या था? इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना जरूरी है।
वरिष्ठ अधिकारी तक पहुंच भी बनी सवाल
मामले में एक और गंभीर आरोप यह है कि जब अवैध शराब बिक्री की सूचना के संबंध में रतलाम जिला आबकारी विभाग के सहायक आयुक्त विकास मंडलोई से संपर्क करने के लिए विभाग के जिम्मेदारों से मोबाइल फोन नंबर मांगा गया, तो नंबर उपलब्ध नहीं कराया गया। यदि किसी नागरिक या सूचना देने वाले व्यक्ति को अवैध गतिविधि की जानकारी विभाग तक पहुंचानी है, तो शिकायत को उचित अधिकारी तक पहुंचाने की व्यवस्था पारदर्शी और सुगम होना चाहिए। यहां सवाल व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाने का नहीं, बल्कि व्यवस्था की जवाबदेही का है। यदि कोई सूचना गंभीर प्रकृति की है तो उसे किस अधिकारी तक, किस माध्यम से और कितने समय में पहुंचाया जाता है, इसकी स्पष्ट व्यवस्था होना जरूरी है।
ब्लैक में शराब से सरकारी खजाने को नुकसान
अवैध रूप से शराब की बिक्री का असर केवल कानून के उल्लंघन तक सीमित नहीं रहता। यदि शराब की बिक्री वैध लाइसेंस और निर्धारित प्रक्रिया के बाहर होती है तो शासन को मिलने वाले आबकारी राजस्व पर भी विपरीत असर पड़ता है। यही वजह है कि अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई आबकारी विभाग की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। यदि किसी क्षेत्र में लंबे समय तक कथित रूप से ब्लैक में शराब बिकती रहती है और विभाग को इसकी जानकारी भी मिलती रहती है, तो निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या केवल शिकायतों का इंतजार करेगा विभाग?
रतलाम शहर में अवैध शराब की बिक्री को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करने के बजाय विभाग की नियमित निगरानी और आकस्मिक जांच भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। डाट की पुल क्षेत्र के मामले में भी अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग के जिम्मेदार मौके पर जाकर जांच करता है या नहीं। यदि अवैध बिक्री की पुष्टि होती है तो संबंधितों के खिलाफ सख्त नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
आबकारी के जिम्मेदारों से सीधे सवाल
डाट की पुल सहित पटरी पार क्षेत्रों में कथित ब्लैक में शराब बिक्री के मामले में अब आबकारी विभाग से कुछ सीधे सवालों के जवाब अपेक्षित हैं—
1) शिकायत मिलने के बाद क्या विभाग ने मौके पर जांच की?
2) यदि जांच हुई तो क्या मिला?
3) क्या क्षेत्र में शराब बिक्री करने वालों के लाइसेंस और स्टॉक की जांच की गई?
4) शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई तो उसका कारण क्या था?
5) क्या विभाग के पास क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री की पहले से कोई जानकारी नहीं थी?
6) यदि जानकारी नहीं थी तो विभाग के जिम्मेदार कर्मचारी और अधिकारियों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
7) कथित अवैध बिक्री से शासन को राजस्व का कितना नुकसान होने की आशंका है?
आबकारी विभाग सूचना पर क्यों डाल रहा पर्दा ?
डाट की पुल सहित पटरी पार क्षेत्रों में माफिया द्वारा बेची जा रही अवैध शराब के खिलाफ आबकारी विभाग के जिम्मेदारों ने भले ही आंखे मूंद रखी हो, लेकिन सूचना मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने के आरोप भी इतने गंभीर हैं कि उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब निगाह आबकारी विभाग पर है। विभाग यदि वास्तव में अवैध शराब के खिलाफ गंभीर है तो उसे जांच कर तथ्य सार्वजनिक करने और दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि सूचना मिलने के बाद कार्रवाई में देरी क्यों हुई।

Website Design By
KAMAKSHI WEB
CONTACT : +91-9753910111


