


रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। मध्य प्रदेश के रतलाम (Ratlam) जिले के ग्राम बिबडोद में शासकीय भूमि पर संचालित खदान में गंभीर अनियमितताओं का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब 1 करोड़ रुपये की राजस्व हानि और खदान में गंभीर गड़बड़ियों के आरोपों के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने पर खनिज विभाग (Mineral Department) की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। खदान संचालक गोपाल चौधरी के खिलाफ पूर्व में जारी नोटिस का हवाला देते हुए एक बार फिर शिकायत कलेक्टर अजय कटेसरिया के पास पहुंची है।
डेम के नजदीक खुदाई और ब्लास्टिंग
शिकायत के अनुसार ग्राम बिबडोद स्थित शासकीय भूमि सर्वे क्रमांक 65, रकबा 2 हेक्टेयर में संचालित खदान के निरीक्षण के दौरान कई अनियमितताएं सामने आई थीं। इनमें पलसोड़ी के नवनिर्मित डेम से निर्धारित 200 मीटर की दूरी के भीतर ब्लास्टिंग और अवैध खुदाई का आरोप प्रमुख है। शिकायतकर्ता का दावा है कि खदान में डेम से महज 16 मीटर तक खुदाई की गई, जबकि 16 मई 2023 को खनिज शाखा (Mineral Department) द्वारा जारी निर्देशों में डेम को नुकसान से बचाने के लिए 200 मीटर की दूरी छोड़कर ब्लास्टिंग करने की हिदायत दी थी। डेम से आसपास के सैकड़ों ग्रामीणों को पानी उपलब्ध होने के कारण इस मामले को सुरक्षा की दृष्टि से भी गंभीर बताया गया था।
स्वीकृत पट्टे से बाहर क्रेशर, सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा
मामले में एक अन्य गंभीर बिंदु स्वीकृत खनन क्षेत्र से बाहर क्रेशर मशीन स्थापित किए जाने का है। शिकायत में उल्लेख है कि जांच के दौरान क्रेशर मशीन स्वीकृत उत्खनन पट्टा क्षेत्र से बाहर शासकीय भूमि पर संचालित पाई गई थी। मौके पर लगभग 2 हजार घनमीटर गिट्टी और 10 एमएम सामग्री का भंडारण होने की बात भी सामने रखी गई है। इसके अलावा श्रमिकों के निवास और निजी उपयोग के लिए निर्माण तथा स्वीकृत 2 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर कथित कब्जे के आरोप भी हैं।
छह मीटर से अधिक गहराई तक उत्खनन
नोटिस में खदान में निर्धारित सीमा से अधिक, यानी 6 मीटर से ज्यादा गहराई तक उत्खनन किए जाने का उल्लेख होने की बात शिकायतकर्ता ने कही है। शिकायत के मुताबिक मध्यप्रदेश गौण खनिज नियमावली, 1996 के नियम 30 के तहत आवश्यक सूचना और संबंधित अनुमति भी प्रस्तुत नहीं की गई थी। खदान क्षेत्र में तार फेसिंग, सीमांकन के चिह्न और खदान संबंधी जानकारी का बोर्ड नहीं होने की बात भी शिकायत में प्रमुखता से उठाई गई है।
मासिक और वार्षिक विवरणी गायब
खदान संचालक पर मासिक, अर्द्धवार्षिक और वार्षिक विवरणियां प्रस्तुत नहीं करने का भी गंभीर आरोप है। पर्यावरणीय स्वीकृति की शर्तों के तहत अनिवार्य पौधारोपण, सीईआर गतिविधियों और प्रत्येक छह माह में अनुपालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के दायित्वों के पालन पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन सभी बिंदुओं की जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए।
महज नोटिस जारी कर निभाई जिम्मेदारी
कलेक्टर कार्यालय की खनिज शाखा (Mineral Department) की ओर से कि जारी खदान संचालक को नोटिस जारी कर 30 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया था। इसके बावजूद मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई? नोटिस का जवाब क्या दिया गया ? विभाग ने आरोपों की जांच किस स्तर तक पूरी की ? इन तमाम सवालातों ने सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूरे मामले में हुई शिकायत में अब एक करोड़ रुपये की राजस्व हानि का दावा करते शिकायतकर्ता ने विभाग से जवाबदेही तय करने की मांग भी की है।
मुख्यमंत्री से लोकायुक्त तक पहुंचा मामला
शिकायतकर्ता ने रतलाम (Ratlam) कलेक्टर और जिला खनिज अधिकारी से मांग की है कि पूर्व में नोटिस में दर्ज प्रत्येक बिंदु की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो खनन पर रोक लगाने, दंडात्मक कार्रवाई करने, पर्यावरणीय क्षति की भरपाई कराने और अवैध उत्खनन से संबंधित राशि की वसूली करने की मांग की गई है। साथ ही खदान संचालक के जवाब और अब तक की गई विभागीय कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया है। मामले में शिकायत मुख्यमंत्री, खनिज विभाग प्रमुख सचिव और लोकायुक्त को भी भेजी गई है।
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