


रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। मध्यप्रदेश शासन के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप (Minister Chetan Kashyap) की माताजी एवं धर्मपरायण समाजसेवी तेजकुंवरबाई काश्यप का रविवार को मुंबई में लंबी अस्वस्थता के बाद निधन हो गया। वे 83 वर्ष की थीं। उनके निधन से काश्यप परिवार सहित धार्मिक, सामाजिक और सेवा क्षेत्र में शोक की लहर व्याप्त है। वे भावना-शैलेन्द्र मानावत की भी माताजी तथा प्रसिद्ध युवा संगीतकार एवं उद्योगपति सिद्धार्थ काश्यप और श्रवण काश्यप की दादीजी थीं।
दिवंगत तेजकुंवरबाई काश्यप की अंतिम यात्रा सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को सुबह 10.30 बजे रतलाम स्थित निवास ‘वीसाजी मेंशन’, स्टेशन रोड से निकलेगी। स्वर्गीय तेजकुंवरबाई काश्यप का जन्म 17 मार्च 1943 को मध्यप्रदेश के कुक्षी में हुआ था। उनके पिता स्वर्गीय चंपालालजी खूंटवाला ने पालिताना तीर्थ में त्रिस्तुतिक जैन समाज की प्रथम धर्मशाला ‘चंपा निवास’ का निर्माण करवाया था। वर्ष 1958 में उनका विवाह रतलाम निवासी अशोक कुमारजी काश्यप से हुआ। वर्ष 1964 में पति के आकस्मिक निधन के बाद मात्र 21 वर्ष की आयु में उन्होंने अदम्य साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ परिवार की जिम्मेदारियां संभालीं। उन्होंने अपने पुत्र चेतन्य और पुत्री भावना का पालन-पोषण करते हुए उन्हें संस्कारित बनाया तथा पारिवारिक दायित्वों का पूरी निष्ठा से निर्वहन किया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने धर्म, तपस्या और जनसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखी। उनका संपूर्ण जीवन संघर्ष, त्याग और परिवार के प्रति समर्पण की मिसाल रहा।
कठिन तपस्याओं और जैन तीर्थों के प्रति रही विशेष आस्था
स्वर्गीय तेजकुंवरबाई काश्यप का धर्म, तपस्या और साधना के प्रति गहरा समर्पण था। उन्होंने अपने जीवन में दो वर्षीतप, एक मासक्षमण, नौ एवं आठ उपवास तथा बीस स्थानक ओलीजी सहित अनेक कठिन धार्मिक तपस्याएं पूर्ण कीं। सम्मेद शिखरजी, पालिताना और गिरनार सहित देश-विदेश के विभिन्न जैन तीर्थों की यात्राएं कर उन्होंने धर्म और आध्यात्मिक साधना के प्रति अपनी आस्था को निरंतर मजबूत बनाए रखा। वे जीवनपर्यंत धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहीं। उनकी धर्मनिष्ठा, सादगी और अनुशासित जीवनशैली से अनेक लोग प्रेरित होते रहे।
‘अहिंसा ग्राम’ में जरूरतमंद परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने में योगदान
समाजसेवा के क्षेत्र में स्वर्गीय तेजकुंवरबाई काश्यप का योगदान उल्लेखनीय रहा। वर्ष 2005 में चेतन्य काश्यप फाउंडेशन द्वारा रतलाम में स्थापित ‘अहिंसा ग्राम’ में उन्होंने 100 जरूरतमंद परिवारों के पुनर्वास, स्वावलंबन और संस्कार निर्माण से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने महिलाओं को सिलाई, बुनाई, कढ़ाई सहित विभिन्न कौशलों का प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ने तथा स्वसहायता समूहों के माध्यम से उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका मानना था कि जरूरतमंदों की सहायता के साथ उन्हें स्वावलंबी बनाना भी समाजसेवा का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
सेवा संस्थाओं से जुड़कर किया जनकल्याण का कार्य
मुंबई स्थित आदर्श मानव सेवा ट्रस्ट और आदर्श जैन हेल्थ सेंटर सहित विभिन्न जनकल्याणकारी संस्थाओं से जुड़कर उन्होंने जरूरतमंदों की चिकित्सा, सहायता और सेवा के कार्यों में योगदान दिया। उन्होंने पार्श्वनाथ महिला मंडल की स्थापना की और विभिन्न धार्मिक महिला मंडलों का नेतृत्व करते हुए महिलाओं को धर्म, संस्कार और समाजसेवा की गतिविधियों से जोड़ा। उनके सेवाभावी व्यक्तित्व में धर्मनिष्ठा, वात्सल्य, सादगी और दृढ़ संकल्प का अनूठा समन्वय था। उन्होंने धार्मिक आस्था को समाजसेवा से जोड़ते हुए जरूरतमंदों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया।
परिवार ने खोई मार्गदर्शक और समाज ने समर्पित सेवाभावी व्यक्तित्व
स्वर्गीय तेजकुंवरबाई काश्यप का जीवन त्याग, तपस्या, पारिवारिक मूल्यों और जनसेवा के प्रति समर्पण का प्रेरक उदाहरण रहा। उनके निधन से काश्यप परिवार ने अपनी स्नेहमयी मातृशक्ति और मार्गदर्शक को खो दिया है। वहीं धार्मिक एवं सामाजिक क्षेत्र में भी उनके योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा।
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