


रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। खुद को नारकोटिक्स विभाग की टीआई (टाउन इंस्पेक्टर) बताकर करोड़ों रुपये की ठगी करने के आरोप में रतलाम (Ratlam) में गिरफ्तार सपना ठाकुर के मामले में अब उसके करीबी संपर्कों और कथित मददगारों पर भी पुलिस का शिकंजा कसने लगा है। इस मामले में पुलिस विभाग के हेड कांस्टेबल नीरज त्यागी की भूमिका जांच के दायरे में आई है। सपना ठाकुर की पिछले दो वर्षों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) में त्यागी से बातचीत के संदिग्ध पहलू सामने आने के बाद रतलाम पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसे सस्पेंड कर दिया है। रतलाम एसपी अमित कुमार के निर्देश पर अब यह पड़ताल की जा रही है कि सपना ठाकुर को फरारी के दौरान मदद पहुंचाने या ठगी के मामलों में उसकी कोई भूमिका तो नहीं थी।
वंदेमातरम् न्यूज ने उठाया था संरक्षण का सवाल
फर्जी महिला टीआई सपना ठाकुर का मामला सामने आने के बाद वंदेमातरम् न्यूज ने प्रमुखता से यह सवाल उठाया था कि आखिर सपना ठाकुर को पर्दे के पीछे से कौन संरक्षण दे रहा था और किन लोगों की मदद से वह लंबे समय तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर रही? खबर के माध्यम से सपना के संपर्कों और उसे कथित तौर पर संरक्षण देने वालों की भूमिका की जांच किए जाने की आवश्यकता को प्रमुखता से सामने रखा गया था।
करीबी रहे अन्य संदिग्ध पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच
वंदेमातरम् न्यूज की खबर के बाद पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गोपनीय जांच कराई। जांच के दौरान सपना ठाकुर के संपर्क में रहे संदिग्ध पुलिसकर्मियों की भूमिका की पड़ताल की गई। इसी क्रम में हेड कांस्टेबल नीरज त्यागी का नाम सामने आने के बाद उसे सस्पेंड किया गया है। पुलिस अब सपना ठाकुर के करीबी रहे अन्य संदिग्ध पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। संभावना है कि आरोपी सपना ठाकुर को गैर कानूनी तरीके से मदद पहुंचाने वाले और भी चेहरे जल्द बेनकाब हो सकते हैं। इस कार्रवाई को मामले में संभावित संरक्षण नेटवर्क की पड़ताल की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
फरारी के दौरान संपर्क में रहने की आशंका
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सपना ठाकुर के खिलाफ औद्योगिक क्षेत्र थाने में धोखाधड़ी का एक मामला दर्ज था, जिसमें वह लंबे समय तक फरार रही थी। उस अवधि में हेड कांस्टेबल नीरज त्यागी इसी थाने में पदस्थ था। जांच में सामने आए संपर्कों के आधार पर पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फरारी के दौरान त्यागी और सपना के बीच किस तरह की बातचीत होती थी और क्या उसे पुलिस कार्रवाई से संबंधित कोई जानकारी उपलब्ध कराई गई थी। संदेह यह भी है कि यदि सपना को पुलिस विभाग से जुड़ी गोपनीय या कार्रवाई संबंधी जानकारी मिली थी, तो वह जानकारी किस माध्यम से उस तक पहुंची।
दो साल की CDR में सामने आया संपर्क
सपना ठाकुर की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसके पुराने मामलों, संपर्कों और कथित गतिविधियों की पड़ताल शुरू की। इसी दौरान पिछले दो वर्षों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड में नीरज त्यागी से संपर्क की जानकारी सामने आने की बात कही जा रही है।इसके बाद एसपी अमित कुमार ने गोपनीय तरीके से मामले की जांच कराई। भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद त्यागी को बाजना थाने से सस्पेंड किया गया। अब जांच का प्रमुख बिंदु यह है कि दोनों के बीच बातचीत की प्रकृति क्या थी, क्या संपर्क केवल व्यक्तिगत स्तर का था या इसके पीछे कोई अन्य उद्देश्य भी था तथा क्या सपना को किसी प्रकार की अनुचित मदद मिली थी।
सात शिकायतों से खुला ठगी का मामला
सपना ठाकुर के खिलाफ अलग-अलग लोगों से रुपये लेने के संबंध में करीब सात शिकायतें सामने आने की जानकारी है। आरोप है कि वह खुद को नारकोटिक्स विभाग की टीआई बताकर तथा सरकारी अधिकारियों से संपर्क होने का प्रभाव जमाकर लोगों को काम कराने, सरकारी स्तर पर मदद दिलाने और कानूनी कार्रवाई से राहत दिलाने का भरोसा देती थी। इसी कथित प्रभाव का इस्तेमाल कर लोगों से रुपये लेने के आरोपों की पुलिस जांच कर रही है। अब जांच का दायरा केवल सपना ठाकुर तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि उसके संपर्कों और संभावित मददगारों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है।
अब संरक्षण देने वालों की भूमिका पर नजर
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि यदि सपना ठाकुर लंबे समय तक फरार रही और खुद को प्रभावशाली सरकारी अधिकारी बताकर लोगों से संपर्क करती रही, तो उसे किन लोगों का साथ मिल रहा था? क्या किसी ने पुलिस की कार्रवाई से जुड़ी जानकारी साझा की या उसे बचाने में मदद की? क्या ठगी के मामलों में किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका रही? वंदेमातरम् न्यूज द्वारा उठाए गए संरक्षण संबंधी सवाल के बाद हुई कार्रवाई ने इस मामले को एक नया मोड़ दिया है। हेड कांस्टेबल नीरज त्यागी का सस्पेंड होना जांच की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
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