


रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने और धमकाने के बहुचर्चित आरोपों से घिरे पश्चिम रेलवे रतलाम (Ratlam) मंडल में पदस्थ डिप्टी सीटीआई व्दारकेश अय्यर को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। न्यायाधीश बरखा दिनकर की कोर्ट ने मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों, गवाहों के बयानों और प्रतिपरीक्षण के दौरान उन्हें दोषमुक्त कर दिया।
बता दें कि 23 फरवरी 2021 को एक महिला ने डिप्टी सीटीआई व्दारकेश अय्यर के खिलाफ शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने और धमकाने का आरोप लगाते हुए रतलाम के स्टेशन रोड थाने में शून्य में एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके आधार पर रतलाम जीआरपी थाना में संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू की गई थी।
अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट पहुंचे थे अय्यर
प्रकरण दर्ज होने के बाद व्दारकेश अय्यर ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में अग्रिम जमानत याचिका प्रस्तुत की थी, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया था। इसके बाद महिला द्वारा महाराष्ट्र में भी उनके खिलाफ एक अन्य मामला दर्ज कराया गया। कोरोना काल के दौरान महाराष्ट्र पुलिस के माध्यम से रतलाम में उनकी गिरफ्तारी करवाने के प्रयास किए जाने का भी आरोप सामने आया। इस संबंध में की गई शिकायतों के बाद उच्च न्यायालय ने अय्यर की ओर से प्रस्तुत याचिका पर पुनः अग्रिम जमानत का आदेश दिया। इसके बाद प्रकरण की जांच के लिए विशेष दल गठित किया गया। दल में शामिल तत्कालीन जीआरपी थाना प्रभारी इंदौर गायत्री सोनी ने अग्रिम जमानत आदेश के पालन में अय्यर को रिहा किया। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया था।
सुनवाई के दौरान सामने आए कई महत्वपूर्ण तथ्य
कोर्ट में विचारण के दौरान डिप्टी सीटीआई की ओर से अधिवक्ता अमित कुमार पांचाल ने दस्तावेज प्रस्तुत किए तथा अभियोजन पक्ष के गवाहों का प्रतिपरीक्षण किया। बचाव पक्ष के अनुसार, सुनवाई के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिनसे अभियोजन के आरोप संदेहास्पद प्रतीत हुए। इनमें प्रमुख रूप से सामने आया कि महिला द्वारा वर्ष 2018 में भी अय्यर के खिलाफ शिकायत की गई थी। एफआईआर में कथित घटना की तारीख 20 दिसंबर 2020 बताई गई, जबकि शिकायत करीब दो माह बाद 23 फरवरी 2021 को दर्ज कराई गई थी। बचाव पक्ष ने यह भी कोर्ट के समक्ष रखा कि संबंधित महिला पहले से विवाहित थी और उसका पति जीवित था। दोनों के बीच कानूनी रूप से तलाक भी नहीं हुआ था। इसके अलावा महिला द्वारा अय्यर को वाट्सएप चैट के माध्यम से धमकियां दिए जाने के तथ्य भी प्रस्तुत किए गए।
घटना के दिन रतलाम में मौजूदगी पर भी उठे सवाल
बचाव पक्ष की ओर से यह तथ्य भी रखा गया कि महिला ने जिस तारीख को घटना होना बताया, उस दिन वह रतलाम में मौजूद ही नहीं थी। महिला और उसके पति के खिलाफ महाराष्ट्र में दर्ज एक अन्य अपराध का भी उल्लेख किया गया, जिसमें दोनों समय-समय पर उपस्थित होते रहे थे। प्रकरण में एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए। बताया गया कि महिला पहले जीआरपी थाना रतलाम पहुंची थी, जहां से घटनास्थल स्टेशन रोड थाना क्षेत्र की एक होटल का बताकर उसे स्टेशन रोड थाने भेजा गया। वहां शून्य पर एफआईआर दर्ज कर बाद में प्रकरण जीआरपी थाना रतलाम को भेजा गया।
पुलिस सहित कई गवाहों के हुए बयान
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से शिकायतकर्ता महिला के अलावा तत्कालीन जीआरपी थाना प्रभारी इंदौर गायत्री सोनी, तत्कालीन जीआरपी थाना प्रभारी अजय कुमार मिश्रा सहित अन्य गवाहों के बयान कराए गए। वहीं बचाव पक्ष ने दस्तावेजों और गवाहों के प्रतिपरीक्षण के माध्यम से अभियोजन के आरोपों पर सवाल उठाए। बचाव पक्ष का आरोप था कि अय्यर को गिरफ्तार करवाकर जेल भेजने के लिए अलग-अलग स्तर पर प्रयास किए गए। यहां तक कि अग्रिम जमानत का आदेश होने के बावजूद महाराष्ट्र पुलिस के माध्यम से अन्य मामले में गिरफ्तारी करवाने की कोशिश की गई।
कोर्ट ने संदेहास्पद पाया प्रकरण
प्रकरण के समस्त तथ्यों, दस्तावेजों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद तृतीय अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने मामले को संदेहास्पद मानते हुए अभियोजन पक्ष के आरोपों को प्रमाणित नहीं पाया। कोर्ट ने डिप्टी सीटीआई व्दारकेश अय्यर को आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। करीब पांच साल से चल रहे इस मामले में कोर्ट के फैसले से अय्यर को बड़ी कानूनी राहत मिली है।
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