रतलाम के महालक्ष्मी मंदिर में सजा कुबेर का खजाना, महालक्ष्मी के साथ यहां विराजी है अष्टलक्ष्मी

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रतलाम, वन्देमातरम् न्यूज।
मध्यप्रदेश के रतलाम में माणकचौक स्थित महालक्ष्मी जी का मंदिर कुबेर के खजाने से सज चुका है। महालक्ष्मी जी की प्रतिमा सहित पूरे मंदिर को नोट, सोने, चांदी के आभूषणों से सजाया गया है। महालक्ष्मी जी के दर्शन व सजावट को देखने मे बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे है।
धन की देवी महालक्ष्मी के साथ अष्ट लक्ष्मी भी यहां विराजमान है। देश का एकमात्र ऐसा यह मंदिर है जो कि दीपावली पर धन दौलत से सजाया जाता है। मंदिर में पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरूआत धनतेरस से हो गई है। महालक्ष्मी मंदिर को करोड़ो रुपए व सोने चांदी के आभूषणों से सजाया गया है। मंदिर को सजाने के लिए भक्तों ने अपने सोने चांदी हीरे जवाहरात के साथ साथ नकदी प्रदान की है।
आस्था का केंद्र बना महालक्ष्मी मंदिर
दीपावली के समय हीरा, पन्ना, मोती सहित करोड़ों रुपए की नगदी चढ़ने के मामले में प्रसिद्ध हो चुके रतलाम शहर के माणकचौक स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर हजारों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया है। माना जाता है कि अतिप्राचीन मंदिर में सच्चे मन से किए गए दर्शन से जीवन से जुड़ी हर बाधा दूर होती है। इसलिए इस मंदिर में हर साल दर्शन करने के लिए भक्तों की संख्या बढ़ती जा रही है।

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नोट व आभूषण से सजा महालक्ष्मी मंदिर।

400 साल पुराना मन्दिर
शहर के बीचोबीच बने श्री महालक्ष्मी मंदिर शहर ही नहीं जिले का प्रमुख धार्मिक तीर्थ स्थान है। माता के मंदिर में अष्ट लक्ष्मी की भी प्राणप्रतिष्ठा की हुई है। मंदिर की स्थापना 400 वर्ष पूर्व तत्कालीन रियासत के राजा रतनसिंह ने करवाई थी। इस मंदिर में इन प्राचीन प्रतिमाओं के अतिरिक्त श्री अष्टलक्ष्मी की प्रतिमाएं भी है। ऐसा मध्यप्रदेश में यह एकमात्र मंदिर है जहां श्री महालक्ष्मी के साथ साथ अष्टलक्ष्मी भी हो। इनमे श्री ऐश्वर्य लक्ष्मी, श्री संतान लक्ष्मी, श्री वीर लक्ष्मी, श्री विजया लक्ष्मी, श्री अधी लक्ष्मी, श्री धान्य लक्ष्मी, श्री लक्ष्मीनारायण, श्री धन लक्ष्मी की प्रतिमाएं है। इनकी भी भक्त नियमित पूजन करते है।
प्रसाद के रूप में लौटाई जाते है वापस आभूषण व नगदी
मंदिर के पंडित संजय पुजारी बताते है कि श्रद्धालु मंदिर में जो भी नोट जेवरात श्रद्धा पूर्वक सजावट के लिए देते है, इन्हें वापस भाई दूज से प्रसाद स्वरूप धन लौटा दिया जाता है। श्रद्धालु घर जाकर नोट व आभूषण तिजोरी में रखते है। इसके पीछे मान्यता है कि घर में हमेशा बरकत बनी रहती है। जो भी आमजन नोट व आभूषण देते है उनका रिकॉर्ड मंदिर में रखा जाता है।

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