
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। मध्य प्रदेश के रतलाम (Ratlam) से एक बेहद दुखद और सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक पटवारी रविशंकर खराड़ी ने अपने ही घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। यह घटना तब हुई, जब महज एक दिन पहले ही रविशंकर के छोटे भाई की शादी हुई थी। घर में अभी शहनाइयों की गूंज थमी भी नहीं थी कि मातम पसर गया। इस घटना के बाद पूरे रतलाम प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है और कटघरे में खड़ा हो गया है। पटवारी की खुदकुशी के बाद प्रांतीय पटवारी संघ के बैनर तले नायब तहसीलदार सविता राठौर के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज करने की मांग को लेकर औद्योगिक थाने का घेराव सुबह 4. 30 बजे तक चलता रहा। इस दौरान पटवारियों के विरोध के दौरान सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार और साथी भी थाने पर धरना देने पहुंचे। रात 12.30 बजे पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने पटवारियों पर दबाव डालने की भी कोशिश की। पूरे घटनाक्रम में रतलाम जिला प्रशासन अब सवालों के घेरे में घिर चुका है।

महिला अफसर पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप

रविशंकर खराड़ी आलोट कस्बे में पटवारी के पद पर तैनात थे। उनकी मौत के बाद एक पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस पत्र में रविशंकर ने आलोट में पदस्थ नायब तहसीलदार सविता राठौर पर मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। पत्र के मुताबिक, अधिकारी उन्हें उनके भाई की शादी के लिए भी छुट्टी या समय नहीं दे रही थी। उन पर काम का बहुत ज्यादा दबाव बनाया जा रहा था।
भ्रष्टाचार और दबाव का एंगल
मामले में मृतक की मां केसरबाई ने भी चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक महिला अधिकारी ने किसी किसान से करीब डेढ़ लाख रुपए लिए थे, लेकिन उसका काम नहीं किया. इसके बाद वह किसान लगातार रविशंकर पर दबाव बना रहा था। मां का कहना है कि इसी खींचतान और दबाव ने उनके बेटे को इस आत्मघाती कदम की ओर धकेला।
सुसाइड नोट भी मिला
घटना की जानकारी मिलते ही औद्योगिक थाना पुलिस एमबी नगर स्थित रविशंकर के घर पहुंची। पुलिस को मौके से दो पेज का एक सुसाइड नोट मिला है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज भेज दिया है। फिलहाल पुलिस सुसाइड नोट की जांच कर रही है और साक्ष्य जुटाने में लगी है. अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आएगी।
पटवारी संघ में भारी आक्रोश
इस घटना के बाद पटवारी संघ और आदिवासी समाज में भारी गुस्सा है। संघ ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग की है। चेतावनी दी गई कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। फिलहाल इस मामले ने तूल पकड़ लिया है और रतलाम जिला प्रशासन के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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