


रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। मध्य प्रदेश के रतलाम (Ratlam) में मुख्यमंत्री जनविश्वास कार्यक्रम के तहत शनिवार को आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर अपेक्षित जनभागीदारी के अभाव में फीका नजर आया। पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं होने के कारण शिविर में शिकायत लेकर पहुंचने वाले आम लोगों की संख्या बेहद कम रही, जबकि विभिन्न विभागों के कर्मचारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। जिला प्रशासन और नगर निगम की ओर से कम्युनिटी हॉल में शिविर आयोजित किया गया था। रक्षाबंधन के अवकाश के कारण कार्यक्रम शुक्रवार के बजाय शनिवार को रखा गया।



कलेक्टर और महापौर शिविर में नहीं पहुंचे

शिविर में कलेक्टर अजय कटेसरिया और महापौर प्रहलाद पटेल की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय रही। अधिकारियों के अनुसार, कलेक्टर की पत्नी की अचानक तबीयत खराब होने के कारण वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। वहीं महापौर के रतलाम से बाहर होने की जानकारी दी गई। नगर निगम आयुक्त अनिल भाना कुछ समय के लिए शिविर में पहुंचे, लेकिन बाद में वे भी वहां से चले गए।



दोपहर 1 बजे तक बेहद कम लोग पहुंचे
प्रचार-प्रसार की कमी का असर शिविर में साफ दिखाई दिया। दोपहर 1 बजे तक केवल गिने-चुने लोग ही अपनी समस्याएं और शिकायतें लेकर पहुंचे। डिप्टी कमिश्नर, पटवारी और विभिन्न विभागों के अधिकारी शिविर में मौजूद रहे, लेकिन शिकायतकर्ताओं की संख्या अपेक्षा से काफी कम रही। निर्धारित समय समाप्त होने के बाद अधिकारी भी लौटने लगे।
फोटो सेशन के बाद चले गए अधिकांश नेता
कार्यक्रम की शुरुआत में आरडीए अध्यक्ष, नगर निगम अध्यक्ष मनीषा शर्मा, आरडीए उपाध्यक्ष गोविंद काकानी, पार्षद पवन सोमानी और मंडल अध्यक्ष मयूर पुरोहित पहुंचे। जनप्रतिनिधियों ने हितग्राहियों को शासन की ओर से आर्थिक सहायता के चेक वितरित किए। फोटो सेशन और संबोधन के बाद अधिकांश जनप्रतिनिधि शिविर से रवाना हो गए। हालांकि आरडीए उपाध्यक्ष गोविंद काकानी कार्यक्रम समाप्त होने तक मौजूद रहे।
डीआईजी और एसपी ने सुनीं लोगों की शिकायतें
शिविर में डीआईजी निमिष अग्रवाल, एसपी अमित कुमार, सीएसपी सत्येंद्र घनघोरिया और थाना प्रभारी मौजूद रहे। मंडल अध्यक्ष मयूर पुरोहित लोगों से हॉल में पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज कराने की अपील करते रहे। इसके बावजूद एसपी अमित कुमार के पास केवल दो-तीन लोग ही शिकायत लेकर पहुंचे। एसपी ने उनकी समस्याएं सुनीं और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
दिव्यांग बेटे को गोद में लेकर पहुंचा पिता
शिविर में एक पिता अपने दिव्यांग बेटे को गोद में उठाकर पहुंचे। उन्होंने बेटे के लिए बैटरी से चलने वाली बाइक उपलब्ध कराने की मांग की। मामले की जानकारी मिलने पर एसडीएम तरुण जैन ने सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारियों को बुलाया। इसके बाद मौके पर ही दिव्यांग के लिए साइकिल की व्यवस्था कराई गई।
90 वर्षीय महिला को लेकर पहुंचा परिवार
जावरा के गोंदीधर्मसी गांव से एक परिवार अपनी 90 वर्षीय बीमार महिला सदस्य को लेकर शिविर पहुंचा। महिला की हालत ऐसी नहीं थी कि वह हॉल के अंदर जा सके। इस पर एसडीएम तरुण जैन, तहसीलदार कुलभूषण शर्मा और आशीष उपाध्याय बाहर पहुंचे और महिला व उसके परिजनों से बातचीत की। परिवार कलेक्टर से मिलने की मांग कर रहा था। अधिकारियों ने उनकी समस्या सुनी और निराकरण का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने परिवार को स्थानीय स्तर पर भी शिकायत दर्ज कराने की बात कही, लेकिन परिजनों का कहना था कि स्थानीय स्तर पर उनकी सुनवाई नहीं हो रही थी। इसी वजह से उन्हें अपनी समस्या लेकर रतलाम पहुंचना पड़ा।
संभागायुक्त की संभावना पर जुटे थे अधिकारी
शिविर में बिजली व्यवस्था के लिए जनरेटर की भी व्यवस्था की गई थी। अधिकारियों के मुताबिक, उज्जैन संभागायुक्त के कार्यक्रम में आने की संभावना के चलते विभिन्न विभागों के अधिकारियों को शिविर में मौजूद रहने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि बाद में संभागायुक्त का दौरा रद्द हो गया। कुल मिलाकर, जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से आयोजित मुख्यमंत्री जनविश्वास शिविर में आमजन की कम भागीदारी ने प्रचार-प्रसार और आयोजन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए।

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