
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। रतलाम मेडिकल कॉलेज (Ratlam Medical College) में लंबे समय से बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के साथ डॉक्टरों की मनमानी पर अब नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) मुहर लगा चुका है। 8 जून 2026 को जब दिल्ली से नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) की चार सदस्यीय टीम निरीक्षण के लिए पहुंची थी, उसके द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के बाद नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) ने रतलाम मेडिकल कॉलेज की मान्यता नवीनीकरण और अव्यवस्थाओं पर नोटिस जारी किया है। हालांकि यह नोटिस 23 जून 2026 को रतलाम मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. अनीता मूथा को जारी हुआ था, लेकिन इस नोटिस को दबा दिया गया था। वंदेमातरम् न्यूज के पास प्राप्त नोटिस चीख-चीख कर बयां कर रहा है कि रतलाम मेडिकल कॉलेज में सिर्फ दिखावा भर किया जा रहा है और इसकी दुर्दशा किसी सरकारी डिस्पेंसरी से कम नहीं है।
बता दें कि 8 जून 2026 को नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) की दिल्ली से जायजा लेने पहुंची टीम ने रतलाम मेडिकल कॉलेज और अस्पताल परिसर में व्यापक अव्यवस्था, डॉक्टरों की मनमानी तथा प्रशासनिक लापरवाही से रूबरू हुई थी। निरीक्षण के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह रही थी कि ड्यूटी समय शुरू होने के 15 मिनट बाद भी करीब 90 प्रतिशत डॉक्टर अपने चैंबरों में मौजूद नहीं थे, जबकि मरीज इलाज के इंतजार में कतारों में खड़े थे।
टीम को खाली मिले थे डॉक्टरों के चैंबर
दिल्ली से एनएमसी की टीम सुबह करीब 8.15 बजे रतलाम मेडिकल कॉलेज (Ratlam Medical College) पहुंची थी। टीम ने सबसे पहले डीन कार्यालय का रुख किया था, लेकिन डीन डॉ. अनीता मूथा जिले से बाहर होने के कारण गैर हाजिर मिली थीं। इसके बाद जब टीम अस्पताल में उपचार व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने पहुंची तो अधिकांश डॉक्टरों के चैंबर खाली मिले थे। निरीक्षण में सामने आया था कि सुबह 8 बजे ड्यूटी शुरू होने के बावजूद बड़ी संख्या में डॉक्टर अस्पताल नहीं पहुंचे थे और मरीज और उनके परिजन डॉक्टरों का इंतजार कर रहे थे।
ऑनलाइन हाजरी में भी खुल चुकी डॉक्टरों की पोल
दिल्ली की एनएमसी टीम ने डॉक्टरों की ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था की भी जांच की थी। जांच में पाया था कि लगभग 90 प्रतिशत डॉक्टरों ने निर्धारित समय तक अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई। वहीं जिन कुछ डॉक्टरों की उपस्थिति दर्ज थी, उनमें से कई चैंबरों में नहीं थे। निरीक्षण के दौरान कुछ चिकित्सक कैंटीन में बैठे बातचीत करते पाए गए थे। टीम ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए रतलाम मेडिकल कॉलेज प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए थे। निरीक्षण से यह संकेत मिला था कि डॉक्टरों पर प्रशासनिक नियंत्रण प्रभावी नहीं है, जिसके कारण मनमानी का माहौल बना हुआ है।
रतलाम मेडिकल कॉलेज बन चुका रेफरल सेंटर
निरीक्षण के दौरान नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) ने अस्पताल में मरीजों और परिजनों को मिलने वाली सुविधाओं का भी जायजा लिया था। अस्पताल में बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सियां नहीं मिलीं थी, जबकि गर्मी के बावजूद कई स्थानों पर पंखों की व्यवस्था भी नहीं थी। टीम को यह भी देखने को मिला था कि भर्ती मरीजों की तुलना में रेफर किए गए मरीजों की संख्या अधिक है, जिससे रतलाम मेडिकल कॉलेज (Ratlam Medical College) प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़े हुए थे।
सुरक्षा, हेल्प डेस्क और वार्ड प्रबंधन में भी खामियां
रतलाम मेडिकल कॉलेज (Ratlam Medical College) में एनएमसी टीम ने पाया था कि सुरक्षा कर्मियों की उपस्थिति रिकॉर्ड में भले ही पूर्ण दर्शाई गई हो, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे अलग थी। परिसर में अपेक्षित संख्या में सुरक्षाकर्मी मौजूद नहीं मिले थे। वार्डों में डॉक्टरों के नियमित राउंड समय पर नहीं होने की शिकायतें भी निरीक्षण के दौरान सामने आईं थी। मरीजों और परिजनों की सहायता के लिए स्थापित हेल्प डेस्क पर भी कोई कर्मचारी मौजूद नहीं मिला था, जिससे इसकी उपयोगिता केवल औपचारिकता तक सीमित नजर आई।
एनएमसी ने पाई थी यह भी प्रमुख खामियां
1) 90 प्रतिशत डॉक्टर ड्यूटी पर मिले थे गैर हाजिर।
2) ऑनलाइन अटेंडेंस में भी व्यापक अनियमितताएं पाई थी।
3) हॉस्टल में छात्रों के लिए सुरक्षित पेयजल और सुरक्षा व्यवस्था माकूल नहीं थे।
4) मरीजों और परिजनों के लिए बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी।
5) वार्डों में डॉक्टरों के राउंड समय पर नहीं होना पाया था।
6) हेल्प डेस्क पर कर्मचारी अनुपस्थित मिला था।
7) सुरक्षा कर्मियों की संख्या उपस्थिति रिकॉर्ड से कम पाई गई थी।
8) अस्पताल परिसर में निजी एंबुलेंसों का अनियंत्रित संचालन देखा गया था।
9) भर्ती मरीजों की तुलना में रेफर मरीजों की संख्या अधिक पाई थी।
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