Ratlam Medical College : नेशनल मेडिकल काउंसिल निरीक्षण में 90% डॉक्टर गैर हाजिर 

- मान्यता नवीनीकरण के निरीक्षण में सामने आईं गंभीर खामियां, डॉक्टरों की मनमानी और प्रशासनिक ढिलाई पर गंभीर सवाल

Ratlam Medical College  

रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। रतलाम मेडिकल कॉलेज (Ratlam Medical College) में लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर उठ रहे सवालों पर सोमवार को उस समय मुहर लग गई, जब दिल्ली से नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) की चार सदस्यीय टीम निरीक्षण के लिए पहुंची। मेडिकल कॉलेज की मान्यता नवीनीकरण और व्यवस्थाओं का जायजा लेने आई टीम को अस्पताल और कॉलेज परिसर में व्यापक अव्यवस्था, डॉक्टरों की मनमानी तथा प्रशासनिक लापरवाही देखने को मिली। निरीक्षण के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ड्यूटी समय शुरू होने के 15 मिनट बाद भी करीब 90 प्रतिशत डॉक्टर अपने चैंबरों में मौजूद नहीं थे, जबकि मरीज इलाज के इंतजार में कतारों में खड़े दिखाई दिए।

सुबह 8.15 बजे पहुंची टीम, खाली मिले डॉक्टरों के चैंबर

दिल्ली से एनएमसी की टीम सोमवार सुबह करीब 8.15 बजे रतलाम मेडिकल कॉलेज (Ratlam Medical College) पहुंची। टीम ने सबसे पहले डीन कार्यालय का रुख किया, लेकिन डीन डॉ. अनीता मूथा जिले से बाहर होने के कारण मौजूद नहीं थीं। इसके बाद जब टीम अस्पताल में उपचार व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने पहुंची तो अधिकांश डॉक्टरों के चैंबर खाली मिले। निरीक्षण में सामने आया कि सुबह 8 बजे ड्यूटी शुरू होने के बावजूद बड़ी संख्या में डॉक्टर अस्पताल नहीं पहुंचे थे। मरीज और उनके परिजन डॉक्टरों का इंतजार करते रहे, जबकि अस्पताल प्रशासन स्थिति को नियंत्रित करने में असफल दिखाई दिया।

ऑनलाइन हाजरी में भी खुली डॉक्टरों की लापरवाही

दिल्ली की एनएमसी टीम ने डॉक्टरों की ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था की भी जांच की। जांच में पाया गया कि लगभग 90 प्रतिशत डॉक्टरों ने निर्धारित समय तक अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई थी। वहीं जिन कुछ डॉक्टरों की उपस्थिति दर्ज थी, उनमें से कई अपने चैंबरों में नहीं मिले। निरीक्षण के दौरान कुछ चिकित्सक कैंटीन में बैठे बातचीत करते पाए गए। टीम ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए अस्पताल प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। निरीक्षण से यह संकेत मिला कि डॉक्टरों पर प्रशासनिक नियंत्रण प्रभावी नहीं है, जिसके कारण मनमानी का माहौल बना हुआ है।

रतलाम मेडिकल कॉलेज बन चुका रेफरल सेंटर 

निरीक्षण के दौरान नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) ने अस्पताल में मरीजों और परिजनों को मिलने वाली सुविधाओं का भी जायजा लिया। अस्पताल में बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सियां नहीं मिलीं, जबकि गर्मी के बावजूद कई स्थानों पर पंखों की व्यवस्था भी नहीं थी। टीम को यह भी देखने को मिला कि भर्ती मरीजों की तुलना में रेफर किए गए मरीजों की संख्या अधिक है, जिससे रतलाम मेडिकल कॉलेज (Ratlam Medical College) प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़े हुए हैं।

सुरक्षा, हेल्प डेस्क और वार्ड प्रबंधन में भी मिलीं कमियां

रतलाम मेडिकल कॉलेज (Ratlam Medical College) में एनएमसी टीम ने पाया कि सुरक्षा कर्मियों की उपस्थिति रिकॉर्ड में भले ही पूर्ण दर्शाई गई हो, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे अलग थी। परिसर में अपेक्षित संख्या में सुरक्षाकर्मी मौजूद नहीं मिले। वार्डों में डॉक्टरों के नियमित राउंड समय पर नहीं होने की शिकायतें भी निरीक्षण के दौरान सामने आईं। मरीजों और परिजनों की सहायता के लिए स्थापित हेल्प डेस्क पर भी कोई कर्मचारी मौजूद नहीं मिला, जिससे इसकी उपयोगिता केवल औपचारिकता तक सीमित नजर आई।

निजी एंबुलेंस संचालकों की मनमानी भी आई सामने

रतलाम मेडिकल कॉलेज (Ratlam Medical College) के अस्पताल परिसर में निजी एंबुलेंसों की बड़ी संख्या और उनके संचालकों की कथित दबंगई भी एनएमसी टीम के संज्ञान में आई। टीम ने इस व्यवस्था को लेकर भी आपत्ति दर्ज की और अस्पताल परिसर में नियंत्रण एवं निगरानी की आवश्यकता महसूस की।

एनएमसी निरीक्षण में सामने आई प्रमुख खामियां

1) 90 प्रतिशत डॉक्टर निर्धारित समय पर ड्यूटी पर उपस्थित नहीं मिले।

2) ऑनलाइन अटेंडेंस प्रणाली में भी व्यापक अनियमितताएं सामने आईं।

3) हॉस्टल में छात्रों के लिए सुरक्षित पेयजल और सुरक्षा व्यवस्था अपर्याप्त मिली।

4) मरीजों और परिजनों के लिए बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं मिली।

5) वार्डों में डॉक्टरों के नियमित राउंड समय पर नहीं हुए।

6) हेल्प डेस्क पर कर्मचारी अनुपस्थित मिला।

7) सुरक्षा कर्मियों की वास्तविक उपस्थिति रिकॉर्ड से कम पाई गई।

8) अस्पताल परिसर में निजी एंबुलेंसों का अनियंत्रित संचालन देखा गया।

9) भर्ती मरीजों की तुलना में रेफर मरीजों की संख्या अधिक पाई गई।

प्रशासन की चुप्पी ने बढ़ाए सवाल

निरीक्षण में सामने आई गंभीर खामियों और डॉक्टरों की अनुपस्थिति को लेकर जब रतलाम मेडिकल कॉलेज (Ratlam Medical College) प्रबंधन से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो अधीक्षक डॉ. प्रदीप मिश्रा से संपर्क किया। इस बार भी  अपनी मनमानी और लापरवाही से मरीजों को उपजने वाली समस्याओं के सवालों से बचने के लिए अधीक्षक डॉ. प्रदीप मिश्रा ने मोबाइल रिसीव नहीं किया।

एनएमसी की रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

रतलाम मेडिकल कॉलेज (Ratlam Medical College) की मान्यता नवीनीकरण के लिए हुए इस निरीक्षण में सामने आई अव्यवस्थाएं और डॉक्टरों की मनमानी अब एनएमसी की अंतिम रिपोर्ट में किस रूप में दर्ज होती हैं, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। रिपोर्ट के आधार पर कॉलेज की मान्यता, सीट वृद्धि और भविष्य की प्रशासनिक जवाबदेही पर असर पड़ सकता है।


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Aseem Raj Pandey
Aseem Raj Pandeyhttp://www.vandematramnews.com
वर्ष-2000 से निरतंर पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विगत 22 वर्षों में चौथा संसार, साभार दर्शन, दैनिक भास्कर, नईदुनिया (जागरण) सहित अन्य समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए वर्तमान में समाचार पोर्टल वंदेमातरम् न्यूज के प्रधान संपादक की भूमिका का निर्वहन। वर्ष-2009 में मध्यप्रदेश सरकार से जिलास्तरीय अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार के अलावा रतलाम प्रेस क्लब के सक्रिय सदस्य। UID : 8570-8956-6417 Contact : +91-8109473937 E-mail : asim_kimi@yahoo.com

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