तिहरा नृशंस हत्याकांड : चाचा ने 5 अन्य आरोपियों के साथ मिलकर भतीजे और दो मासूम पौतों की हत्या

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रतलाम, वंदेमातरम न्यूज।
जिले के सैलाना स्थित ग्राम देवरुंडा में पिता सहित दो मासूम बच्चों की नृशंस हत्या का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। मामले में पुलिस ने एक महिला सहित 6 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार किया। आरोपियों ने मासूम बच्चों के सामने पिता की पहले लाठियों से बेरहमी से पिटाई की और फिर बेसुध घायल पिता के साथ दोनों जिन्दा बच्चों को मोटर से बांधकर कुएँ में फेंक दिया। मृतक के भाई जगदीश ने पुलिस पर लापरवाही बरतने का गंभीर आरोप लगाया है। जगदीश की माने तो पूर्व में परिजन द्वारा बड़ी अनहोनी की जानकारी पुलिस को दी थी, लेकिन सैलाना थाना से उन्हें यह कहकर रवाना कर दिया था कि जब कोई बड़ी घटना हो तब थाने आना। परिजन का आरोप है कि पुलिस मामले को गंभीरता से लेती तो पिता सहित दो निर्दोष मासूमों की हत्या नहीं होती।
एसपी गौरव तिवारी ने मंगलवार को पुलिस कन्ट्रोल रूम पर पत्रकारवार्ता में बताया मृतक लक्ष्मण भाभर के चाचा पूंजा उर्फ पूनमचंद, खेत की पड़ोसी रुपली खराड़ी सहित उसके बेटे पीरू और दिलीप खराड़ी, कमलेश एवं फुलजी गामड़ ने मिलकर इस हत्याकांड को अंजाम दिया था। आरोपियों ने लक्ष्मण को पहले लाठियों से पीटकर बेहोश कर उसके हाथ-पैर रस्सी से बांधने के बाद दोनों मासूम विशाल (12) एवं पुष्कर (8) को भी मोटर से बांधकर कुएं में फेंक दिया। मृतक लक्ष्मण के साथ रविवार दोपहर उसके दोनों बेटे विशाल एवं पुष्कर खेत पर काम में हाथ बटाने आए थे। सभी आरोपियों का जमीन और खाल के गड्ढे में मोटर डालकर सिंचाई करने को लेकर विवाद चल रहा था। दिवाली पर भी दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद रविवार देर रात खोजबीन के दौरान लक्ष्मण और उसके मासूम बच्चे विशाल-पुष्कर के शव
कुएं में रस्सी से बंधे मिले थे।

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क्या था पूरा मामला
मृतक के भाई जगदीश ने बताया कि रविवार की सुबह सभी लोग खेत पर काम कर रहे थे। कुएं से मोटर और रस्सी बाहर निकाल कर रखी थी। वह पास में ही खेत की जुताई कर रहा था। भाई लक्ष्मण और दोनों भतीजे कुएं के पास ही काम कर रहे थे, लेकिन शाम को वह लोग दिखाई नहीं दिए। बाद में उन्हें ढूंढने जाने पर तीनों के शव कुएं में रस्सी से बंधे मिले थे। इस जघन्य वारदात से पूर्व सैलाना पुलिस थाने को सूचना दी गई थी, लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। पुलिस मामले को गंभीरता से लेती तो निर्दोष पिता और उसके दो मासूम बेटे हत्यारों का शिकार नहीं बनते।

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