– घटना की 48 घंटे तक की जांच को जांचकर्ता चार दिन में भूले
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। मध्य प्रदेश के रतलाम शहर के औद्योगिक थाने में अजीबो-गरीब मामला प्रकाश में आया है। दंपती के साथ हुई मारपीट में पुलिस ने घायलों का उपचार कराए बिना उल्टा उन्हें ही आरोपी बना दिया। खास बात यह है कि विवाद के दो दिन तक मामले की जांच करने वाले औद्योगिक थाने के कार्यवाहक प्रधान आरक्षक चार दिन में ही मामला भूल गए। औद्योगिक थाने पर नियम विरुद्ध की गई एफआईआर के खिलाफ शुक्रवार को दंपती ने एसपी राहुल कुमार लोढ़ा को शिकायत की है। शिकायत में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायतकर्ता टीनू पति राणा राजवीर सिंह सिसोदिया ने शुक्रवार को एसपी कार्यालय में शिकायत में बताया कि वह 16 दिसंबर को पति राणा राजवीर सिंह के साथ दयाल वाटीका के समीप अपने फार्म हाउस पर गई थी। मौके पर बहन रक्षा और भाई जितेंद्र सिसोदिया भी वहां पहुंचकर उनसे विवाद करने लगे। बहन रक्षा और भाई जितेंद्र उन्हें डराने-धमकाने लगे। इस दौरान जब शिकायतकर्ता टीनू ने उन्हें समझाया कि उक्त फार्म हाउस उनके कब्जे में है तो रक्षा और जितेंद्र ने मारपीट शुरू कर दी। शिकायत के साथ सौंपी सीसीटीवी फूटेज में भी स्पष्ट है कि बड़ी बहन के साथ मारपीट में घायल कर उन्हें धमकाया जा रहा है। इसके बाद मौके से दंपती सिसोदिया ने थाने पहुंच घटना बताई तो उनकी सुनवाई किए बगैर रवाना कर दिया। घटना के दो दिन बाद 18 दिसंबर-2023 को थाने पहुंचे पहले पक्ष की सुनवाई और बयान लिए बगैर टीनू और राणा राजवीर सिंह सिसोदिया के खिलाफ उल्टा विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया। पूरे मामले में शिकायतकर्ता टीनू सिसोदिया ने माता-पिता की मौत के बाद भाई जितेंद्र और बहन रक्षा पर उन्हें कब्जे से बेदखल कर पुलिस से सांठगांठ कर झूठी एफआईआर लिखाने की शिकायत की गई है। इसके साथ ही मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की गई है।
सवालों से बचने का अच्छा जवाब
रतलाम औद्योगिक थाने के कार्यवाहक प्रधान आरक्षक तपेश गोसाई से मुद्दे पर चर्चा कर जानकारी लेना चाही तो उन्होंने न्यायालय में होने का हवाला देकर प्रकरण को देखकर ही बता पाने की बात कही। जब उनसे सवाल किया गया कि अपराध क्रमांक 936/23 में आपके द्वारा दो दिन की जांच के बाद अपराध दर्ज किया है। चार दिन पुराना मामला है तो इस संबंध में क्या कहना है? उन्होंने थाने पहुंचकर जानकारी देने की बात कही। थाने पहुंचकर जब पुलिसकर्मी गोसाई के बारे में पूछा तो बताया गया कि वह थाने में नहीं है। इसके बाद उनके द्वारा मोबाइल भी रिसीव नहीं किया गया।
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