– सुबह नल आने पर मोटर का बटन चालू करने के दौरान 14 वर्षीय बालिका को डंसा सांप
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। जिला मुख्यालय के सरकारी अस्पताल में आपात सेवा के नाम पर न तो दवाइयां हैं और नहीं डॉक्टरों में संवेदनशीलता। सोमवार को 14 वर्षीय बालिका को पानी की मोटर का बटन चालू करने के दौरान सांप ने डंसा। परिजन उसे गंभीर अवस्था में लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि ड्यूटी डॉक्टर की असंवेदनशीलता का नतीजा रहा कि बालिका को समय पर उपचार नहीं मिलने से उसकी मौत हो गई। आक्रोशित परिजन और पड़ोसियों ने अस्पताल की पुलिस चौकी के बाहर बैठ जमकर विरोध जताया और जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े किए हैं।

सोमवार सुबह करीब 6.30 बजे नल आने पर आशा (14) पिता जगदीश मईड़ा निवासी अर्जुन नगर मोटर का बटन चालू करने गई थी। कच्चा मकान होने के कारण दीवाल में बने बिल से सांप ने सीधे हाथ पर डस लिया। छात्रा खुद पड़ोस में रहने वाली काकी रेखा चरपोटा के पास गई। कहां काकी सांप ने काट लिया। तभी पास में रहने वाले परिजन व पड़ोसी उसे लेकर सीधे जिला अस्पताल पहुंचे। जिला अस्ताल में करीब डेढ़ घंटे तक बच्ची को इलाज नहीं मिलने पर शरीर में जहर फैलने से उसने परिसर में ही दम तोड़ दिया। परिजनों ने इलाज में देरी करने और जिला अस्पताल में इंजेक्शन बाहर से मंगवाने को लेकर जमकर विरोध के साथ अस्पताल परिसर में धरने पर बैठ गए। ड्यूटी डॉक्टर की असंवेदनशीलता के बाद बच्ची की मौत से आक्रोशित परिजनों ने लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग भी की। मृतिका आशा कक्षा 9वीं की छात्रा थी। छात्रा मूलत: परनाला थाना शिवगढ़ की रहने वाली थी। वह रतलाम में अपने दो छोटे भाई हरीश (12) व शंकर (9) के साथ रहकर पढ़ाई करती थी।
डेढ़ घंटे की असंवेदनशीलता ऐसी रही
मृतिका आशा की काकी रेखा ने वंदेमातरम् न्यूज को बताया कि आशा को जब हम लेकर अस्पताल पहुंचे तो उसकी आंखे खुली थी और सांस भी चल रही थी। ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर व नर्सों ने इलाज करने के बजाए कागज बनवाने के लिए कहा। हमने निवेदन भी किया कि आप उपचार शुरू करो, घर के अन्य लोग भी पीछे-पीछे आ रहे हैं, हम कागज भी तैयार करवा लेंगे, लेकिन किसी ने हमारी विनती नहीं सुनी। भाग-दौड़ कर पर्ची बनवाई तो डॉक्टर ने कहा कि इंजेक्शन बाहर से लाने के लिए पर्ची पर लिख दिया। हमने कहा सुबह का टाइम है मेडिकल नहीं खुलेंगे आप इंतजाम कर दो। लेकिन उन्होंने मना कर दिया। फिर जैसे-तैसे अस्पताल से बाहर जा मेडिकल से करीब 5 हजार 700 रुपए का एक इंजेक्शन लेकर आए। कागजी कार्रवाई करने से लेकर भर्ती करने व इंजेक्शन लाने करने में डेढ़ घंटे से ज्यादा का समय बीत गया और आशा के शरीर में जहर फैलने से उसकी मौत हो गई।
पिता गुजरात में करते हैं मजदूरी
मृतिका आशा के पिता जगदीश मईड़ा गुजरात में मजूदरी करते हैं और मां शिवगढ़ के पुस्तैनी घर परनाला में निवास करती है। बच्चों के भविष्य के लिए माता-पिता ने आशा और उसके दोनों छोटे भाइयों को चाचा हरीशचंद्र के समीप एक किराये के कच्चे मकान में रहकर पढ़ाई करवा रहे थे। हरीशचंद्र ने बताया उनकी भतीजी आशा रतलाम में अपने दो छोटे भाईयों के साथ रहकर शासकीय महारानी लक्ष्मी बाई कन्या उमावि में पढ़ाई करती थी। हरीशचंद्र के अनुसार पानी के मोटर का बटन दबाने के दौरान उसे सांप ने काटा। अस्पताल में समय पर उसे उपचार मिल जाता तो आज वह जिंदा होती।
कार्रवाई करेंगे
सर्पदंश से छात्रा की मौत हुई है। आक्रोशित परिजनों का आरोप है कि उसे समय पर उपचार नहीं मिला है। आक्रोशित परिजनों की शिकायत पर मामले की जांच करवाई जा रही है। जांच में दोषी पाए जाने पर संबंधितों पर कार्रवाई की जाएगी। – डॉ. एमएस सागर, सिविल सर्जन- जिला अस्पताल रतलाम
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