
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। आयम्बिल तपोनिधि परम पूज्या श्री प्रफुल्ला जी म.सा. आदि ठाणा-5 का श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, नीमचौक के तत्वावधान में चातुर्मास (वर्षावास) के लिए रतलाम (Ratlam) नगर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। इस अवसर पर स्टेशन रोड स्थित जैन स्थानक में विशाल धर्मसभा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं एवं गुरु भक्तों ने उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त किया।
जीवन अनित्य, धर्म ही सच्चा सहारा
धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्या श्री प्रफुल्ला जी म.सा. ने कहा कि मानव जीवन अत्यंत क्षणभंगुर है। कब जीवन में कैसी परिस्थिति आ जाए, इसका किसी को पता नहीं होता। इसलिए जब तक शरीर और इंद्रियां समर्थ हैं, तब तक धर्म को अपना सच्चा साथी बना लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस अनित्य संसार में यदि कुछ शाश्वत है तो वह केवल धर्म है।
‘दौलत’ की अनूठी व्याख्या से दिया जीवन का संदेश
महासतीजी ने मन और धन की चंचलता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मन बंदर की तरह निरंतर उछलता-कूदता रहता है। ‘चलं चित्तं, चलं वित्तं’ के सिद्धांत को समझाते हुए उन्होंने ‘दौलत’ शब्द की रोचक व्याख्या की। उन्होंने कहा कि दौलत की दो आदतें होती हैं— पहली, “आवत ही अंधी करे”, अर्थात धन आने पर व्यक्ति अहंकार में अंधा हो जाता है और दूसरी, “जावत करे मतिहीन”, अर्थात धन चले जाने पर मनुष्य विवेक खो बैठता है।
महल भी बन जाते हैं खंडहर, धर्म ही रहता है अमर
उन्होंने कहा कि संसार के बड़े-बड़े महल और हवेलियां भी समय के साथ खंडहर बन जाते हैं, जहां आज चमगादड़ बसेरा करते हैं। यह संसार चलाचली का मेला है और आयुष्य रूपी यह मंदिर भी स्थायी नहीं है। ऐसे में धर्म ही ऐसा तत्व है जो सदैव मनुष्य के साथ रहता है। उन्होंने कहा कि जिसका मन धर्म में रम जाता है, उसे देवता भी नमन करते हैं। इस दौरान उन्होंने प्रेरक सूक्ति सुनाई—”धर्म बढ़ावे धन बढ़े, धन बढ़े तो मन बढ़े। धर्म घटाया धन घटे, धन घटे मन घट जाए।”
रतलाम को बताया धर्म नगरी, आराधना का आह्वान
पूज्या श्री प्रफुल्ला जी म.सा. ने कहा कि मध्यप्रदेश और रतलाम में उनका यह पहला आगमन है। उन्होंने रतलाम को धर्मनगरी बताते हुए सभी श्रावक-श्राविकाओं से चातुर्मास के दौरान अधिकाधिक धर्म आराधना, तप एवं साधना कर कर्मों की निर्जरा करने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि वर्षावास के दौरान सामूहिक सिद्धितप का भी विशेष आयोजन किया जाएगा।
महतीश्री जी ने दिया ‘3M’ का मंत्र
धर्मसभा में पूज्या महासती द्विशतावधानी श्री महतीश्री जी म.सा. ने समय के सदुपयोग पर बल देते हुए ‘3M’ का संदेश दिया। उन्होंने कहा— “Measure Your Time, Manage Your Time and Make Your Time।” उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि अपने समय का मूल्यांकन करें, उसका उचित प्रबंधन करें और उसे द्रव्य नहीं, बल्कि भाव धर्म की साधना में लगाएं।
20 जुलाई को होगा सामूहिक आयम्बिल तप
महतीश्री जी ने जानकारी दी कि पूज्या श्री प्रफुल्ला जी म.सा. की 98वीं ओलीजी आगामी 20 जुलाई को पूर्ण होगी। इस कठिन एवं उग्र तप की अनुमोदना स्वरूप रतलाम श्रीसंघ द्वारा 20 जुलाई को सामूहिक आयम्बिल तप का आयोजन किया जाएगा। इसमें अधिक से अधिक जैन धर्मावलंबियों से सहभागिता कर तप आराधना का लाभ लेने की अपील की गई।
चातुर्मास में होंगे विविध धार्मिक आयोजन
श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, नीमचौक ने गुरु भगवंतों के रतलाम आगमन पर हर्ष व्यक्त करते हुए बताया कि चातुर्मास के दौरान विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों, प्रवचनों, तप-आराधना एवं सामूहिक धार्मिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। संघ ने सभी श्रद्धालुओं से इन आयोजनों में सहभागी बनकर धर्मलाभ लेने का आग्रह किया।
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