
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। रतलाम (Ratlam) सुनार बावड़ी स्थित राधा-कृष्ण मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महापुराण का शनिवार को भक्तिमय वातावरण में भव्य समापन हुआ। समापन दिवस पर भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह एवं सुदामा चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
यह धार्मिक आयोजन शांति बाई स्वर्गीय बंशीलाल जी मोठसरा परिवार द्वारा कराया गया। आयोजन में स्व. बंशीलाल जी के सुपुत्र योगेश मोठसरा एवं जगदीश मोठसरा परिवार सहित मौजूद रहे।

रुक्मणी विवाह प्रसंग से दिया प्रेम और समर्पण का संदेश
पंडित गगन दुबे ने अपने मुखारविंद से भगवान श्रीकृष्ण एवं रुक्मणी विवाह प्रसंग का मनोहारी वर्णन करते हुए प्रेम, समर्पण और सच्ची भक्ति का संदेश दिया। कथा के दौरान श्रद्धालु भगवान की भक्ति में सराबोर नजर आए। पंडित दुबे ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता संसार को यह सीख देती है कि रिश्तों में धन-संपत्ति नहीं, बल्कि प्रेम, अपनापन और भावनाओं का महत्व सर्वोपरि होता है। उन्होंने कहा कि निष्काम भक्ति, श्रद्धा और सच्चा प्रेम ही व्यक्ति को ईश्वर के करीब ले जाता है।
चल समारोह में गूंजे जयकारे, पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत

भागवत महापुराण के समापन अवसर पर भव्य चल समारोह भी निकाला गया। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तजन भजन-कीर्तन करते हुए शामिल हुए। यात्रा मार्ग में विभिन्न स्थानों पर समाजजनों ने पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया। पूरे क्षेत्र में भक्ति गीतों और जयघोषों से वातावरण गुंजायमान हो उठा।
धार्मिक आयोजन जागृत करते हैं संस्कार और आध्यात्मिक चेतना
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि समाजसेवी गणपत लाल शर्मा ने पंडित श्री गगन जी दुबे का स्वागत कर कथा आयोजन परिवार का अभिनंदन किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में संस्कार, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना का संचार करते हैं, जिससे सामाजिक एकता और सकारात्मक सोच को बल मिलता है।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने लिया धर्मलाभ
समापन अवसर पर आयोजित चल समारोह और कथा कार्यक्रम में पवन देवड़ा, रवि शर्मा, मनीष उपाध्याय, राजाराम मोतियानी, हरीश बिंदल, पूरणमल अग्रवाल, मोहनलाल भट्ट, मोहनलाल कसेरा, विश्वजीत टंडन, पुष्पा व्यास, माया बक्शी, प्रेमलता कसेरा, वीणा गोयल, नंदिनी रावत सहित बड़ी संख्या में समाजजन एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। सात दिवसीय कथा महापुराण में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया तथा समापन के अवसर पर प्रसादी ग्रहण की।
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