

– FIR को बताया एकपक्षीय, दोषी पर कार्रवाई नहीं होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। रतलाम (Ratlam) के आनंद कॉलोनी स्थित डॉ. कैलाशनाथ काटजू विधि महाविद्यालय में गणेश उत्सव के दौरान आयोजित गरबा कार्यक्रम को लेकर विवाद ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर तूल पकड़ लिया है। मामले में सोमवार को बजरंग दल ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र भेजकर संगठन के पदाधिकारियों के खिलाफ की गई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराने और प्रकरण को निरस्त करने के साथ दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
बजरंग दल की ओर से मुख्यमंत्री को भेजे गए आवेदन में जिला सह संयोजक सुनील राठौर, जिला गौरक्षा प्रमुख गनी शक्तावत और ऋषभ सुराना सहित अन्य कार्यकर्ताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई को एकपक्षीय और तथ्यहीन बताया है। संगठन का कहना है कि कार्यकर्ता महाविद्यालय में धार्मिक आयोजन के संबंध में अपनी आपत्ति दर्ज कराने पहुंचे थे और इस दौरान पुलिस की मौजूदगी में महाविद्यालय प्रशासन से बातचीत की गई।
CCTV फुटेज और मौके पर मौजूद लोगों के बयान की जांच की मांग
संगठन ने आरोप लगाया कि पुलिस ने महाविद्यालय पक्ष के आवेदन के आधार पर कार्रवाई करने से पहले घटनास्थल के CCTV फुटेज, उपलब्ध वीडियो, मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों तथा समाचार के आधार की समुचित जांच नहीं की। बजरंग दल ने मांग की है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।
गरबा आयोजन की अनुमति की भी जांच की मांग
आवेदन में यह सवाल भी उठाया गया है कि महाविद्यालय में अध्ययन के समय गणेश उत्सव के अंतर्गत गरबा कार्यक्रम आयोजित किया गया था। संगठन ने इसकी अनुमति को लेकर भी जांच की मांग की है। पत्र में पूछा गया है कि क्या कार्यक्रम के लिए विश्वविद्यालय या संबंधित सक्षम स्तर से अनुमति ली गई थी और क्या पुलिस ने इस पहलू की जांच की थी।
‘आरोप सिद्ध हों तो कार्रवाई स्वीकार’
बजरंग दल ने कहा है कि यदि कार्यकर्ताओं पर लगाए गए अभद्रता, हंगामा या अन्य अनुचित व्यवहार के आरोप वीडियो, CCTV अथवा अन्य साक्ष्यों से सिद्ध होते हैं तो संगठन कानून सम्मत कार्रवाई के लिए तैयार है। वहीं, यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो एकपक्षीय कार्रवाई करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और झूठी शिकायत करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए।
पुलिस अधिकारियों पर विभागीय जांच की मांग
संगठन ने आरोप लगाया कि पुलिस का दायित्व केवल शिकायत या आवेदन लेना नहीं, बल्कि घटनाक्रम की सत्यता की जांच करने के बाद विधिसम्मत कार्रवाई करना भी है। आवेदन में आरोप लगाया गया कि बिना पर्याप्त जांच के की गई कार्रवाई के लिए जिम्मेदार वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय जांच की जानी चाहिए।
पुराने मामलों का भी आवेदन में किया उल्लेख
बजरंग दल ने आवेदन में संगठन के पदाधिकारियों के खिलाफ पूर्व में हुई पुलिस कार्रवाई के कुछ मामलों का भी उल्लेख किया है। संगठन का आरोप है कि पूर्व के मामलों में भी पदाधिकारियों के नाम बिना पर्याप्त जांच के प्रकरणों में जोड़े गए तथा पुलिस कार्रवाई की गई। इन मामलों की भी निष्पक्ष समीक्षा की मांग की गई है।
‘छवि धूमिल करने का प्रयास’ का आरोप
संगठन ने कहा कि मौजूदा मामले में की गई कार्रवाई से विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल की छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया है। मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर पदाधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई समाप्त की जाए तथा भविष्य में बिना जांच के इस प्रकार की कार्रवाई नहीं हो, इसके लिए पुलिस अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएं। आवेदन में चेतावनी दी गई है कि यदि मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन द्वारा आंदोलन किया जाएगा। ज्ञापन के लिए बड़ी संख्या में हिन्दू संगठन के पदाधिकारी समर्थकों के साथ वाहन रैली के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे थे।
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