

रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ के आदेश के बाद भी एक नवविवाहित दंपती को सुरक्षा नहीं मिलने और अपने ही घर से बेघर होकर भटकने का मामला सामने आया है। रतलाम (Ratlam) जिले के जावरा शहर थाना क्षेत्र के नासिरगंज निवासी युवक-युवती ने मर्जी से अंतरजातीय विवाह किया है। आरोप है कि युवती के परिजनों से जान का खतरा होने की शिकायत और सुरक्षा की गुहार लेकर दंपती रतलाम एसपी कार्यालय तथा जावरा शहर थाने पहुंचे, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। पीड़ितों का आरोप है कि पुलिस ने हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय जांच के नाम पर उन्हें टाल दिया। अब दंपती ने अधिवक्ता अमित कुमार पांचाल के माध्यम से संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हाईकोर्ट में अवमानना की कार्रवाई प्रस्तुत करने की तैयारी की है।
शादी के बाद दर्ज हुई अपहरण की FIR
पीड़ित दंपती की ओर से की शिकायत के अनुसार, युवक और युवती जावरा के नासिरगंज क्षेत्र में एक ही मोहल्ले में रहते हैं और एक-दूसरे को पहले से जानते हैं। दोनों बालिग हैं। युवती के परिजन विवाह के लिए सहमत नहीं थे, जिसके चलते युवती ने 21 सितंबर 2026 को युवक के साथ घर छोड़कर विवाह कर लिया। इसके बाद युवती के परिजनों ने उसके अपहरण की झूठी एफआईआर जावरा शहर थाने में दर्ज कराई। शिकायत के मुताबिक, पुलिस युवक के परिजनों के घर पहुंची और दोनों को थाने बुलाया। यहां 23 सितंबर को युवती ने अपने परिजनों की मौजूदगी में भी अपनी मर्जी से विवाह करने की बात कही। उसने विवाह संबंधी दस्तावेज पुलिस को सौंपे और युवक के साथ रहने की इच्छा जाहिर की। इसके बावजूद पुलिस ने युवती को वन स्टॉप सेंटर भेज दिया।
कोर्ट में भी जताई साथ रहने की इच्छा, फिर भी नहीं मिली स्वतंत्रता
पीड़ितों के अनुसार, 24 सितंबर को युवती के बयान न्यायालय में दर्ज कराए गए। वहां भी उसने अपनी इच्छा से विवाह करने और पति के साथ जाने की बात कही। इसके बावजूद उसे युवक के सुपुर्द करने के बजाय दोबारा वन स्टॉप सेंटर भेज दिया गया। युवक द्वारा आपत्ति दर्ज कराने के बाद युवती को 29 सितंबर को रतलाम के अपर कलेक्टर के समक्ष भेजा गया। शिकायत के अनुसार, दस्तावेजों की जांच के बाद उसे वहां से मुक्त कर दिया गया। दंपती का आरोप है कि अपनी इच्छा स्पष्ट करने और दस्तावेज प्रस्तुत करने के बावजूद उन्हें सामान्य वैवाहिक जीवन जीने का अवसर नहीं मिल सका।
रतलाम में युवती के परिजनों पर धमकाने और अपहरण के प्रयास का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि युवती के परिजनों को जब उसके रतलाम आने की जानकारी मिली, तो वे वहां पहुंच गए। पीड़ितों का दावा है कि उनके साथ मारपीट और अपहरण का प्रयास किया गया तथा जान से मारने की धमकियां दी गईं। किसी तरह दोनों वहां से निकलकर अपनी जान बचाने में सफल हुए। इसके बाद दंपती ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिका दायर कर स्वयं और युवक के परिवार की सुरक्षा की मांग की। उनका कहना है कि परिवार के लोग लगातार खतरे की आशंका में जी रहे हैं और युवक के घर पर भी दबाव बनाया जा रहा है।
हाईकोर्ट ने दिए थे सुरक्षा के निर्देश
मामले में हाईकोर्ट ने 7 अक्टूबर 2026 को आदेश जारी किया। पीड़ितों के अनुसार, आदेश में युवक-युवती को विवाह और उम्र से संबंधित दस्तावेजों के साथ रतलाम एसपी या संबंधित प्राधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर अपने बयान दर्ज कराने तथा उन्हें धमकाने वाले लोगों की जानकारी देने को कहा गया था। यदि रतलाम एसपी तक पहुंचना संभव न हो, तो निकटतम पुलिस थाने में जाकर यही प्रक्रिया पूरी करने का विकल्प भी दिया गया था। याचिका में बताए गए तथ्यों के अनुसार, हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि पीड़ितों के बयान और जानकारी प्राप्त होने पर पुलिस सुप्रीम कोर्ट द्वारा शक्ति वाहिनी बनाम भारत संघ मामले में दिए गए निर्देशों के अनुरूप तत्काल कार्रवाई करे। आदेश की प्रति संबंधित पुलिस प्राधिकारी को भेजने के निर्देश भी दिए गए थे।
एसपी कार्यालय पहुंचे, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई: दंपती
पीड़ित दंपती का आरोप है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद वे छिपते-छिपाते रतलाम एसपी कार्यालय पहुंचे और संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने तथा अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। लेकिन, उनके अनुसार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की और उन्हें वापस भेज दिया। दंपती का यह भी आरोप है कि 12 अक्टूबर को वे हाईकोर्ट के आदेश के पालन की मांग लेकर जावरा शहर थाने पहुंचे, लेकिन वहां भी कार्रवाई करने के बजाय जांच का हवाला देकर उन्हें टाल दिया गया। उनका कहना है कि जब हाईकोर्ट ने सुरक्षा के संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए हैं, तो इसके बावजूद पुलिस की ओर से प्रभावी कदम नहीं उठाना गंभीर सवाल खड़े करता है।
एक तरफ जान का खतरा, दूसरी तरफ पुलिस से राहत नहीं मिलने का आरोप
पीड़ितों के मुताबिक, युवती के परिजनों से लगातार खतरा बना हुआ है। इसी आशंका के चलते नवविवाहित जोड़े को अपने घर से दूर रहना पड़ रहा है। दंपती ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि सुरक्षा देने और शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई करने के बजाय उन्हें बार-बार अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यदि दोनों बालिगों ने अपनी इच्छा से विवाह किया है और सुरक्षा की मांग करते हुए हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार पुलिस के सामने उपस्थित हुए हैं, तो उनकी शिकायत पर क्या कार्रवाई की गई? क्या उन्हें धमकाने के आरोपों की जांच की गई और उनकी सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया? इन तमाम सवालों के बावजूद दंपती खौफ के साए में सांस ले रहे हैं।
पुलिस के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की तैयारी
लगातार राहत नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए पीड़ित दंपती अब अधिवक्ता अमित कुमार पांचाल के माध्यम से हाईकोर्ट में संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई प्रस्तुत करने जा रहे हैं। उनका कहना है कि वे न्यायालय के आदेश के अनुरूप कार्रवाई और सुरक्षा चाहते हैं, ताकि बिना किसी भय के अपने घर लौटकर वैवाहिक जीवन जी सकें। मामले में जावरा शहर थाना टीआई दीपक मंडलोई ने बताया कि लड़की के परिजन की शिकायत पर एफआईआर हुई थी। कोर्ट का आदेश सर्वोपरी है, युवक-युवती मुझसे मिलकर अपनी समस्या का समाधान करवा सकते हैं।
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