


रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर रतलाम (Ratlam) की सड़कों पर एक बार फिर शौर्य, परंपरा और कला का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। जवाहर व्यायामशाला की ओर से 25 सितंबर की रात पारंपरिक झांकी और अखाड़े का भव्य चल समारोह निकाला जाएगा। समारोह में व्यायामशाला के शरीर साधक शस्त्र कला के प्रदर्शन के साथ मलखंभ के रोमांचक करतब भी प्रस्तुत करेंगे। झिलमिलाती रोशनी से सजी झांकी समारोह का विशेष आकर्षण रहेगी।
चार दशकों से कायम है परंपरा

जवाहर व्यायामशाला के संस्थापक एवं कुश्ती जगत से जुड़े नारायण पहलवान ने करीब 41 वर्ष पहले अनंत चतुर्दशी पर झांकी, अखाड़े और मलखंभ के चल समारोह की परंपरा शुरू की थी। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी निरंतर जारी है। व्यायामशाला से जुड़े गौरव जाट और राजीव रावत ने बताया कि इस वर्ष भी पहलवान और शरीर साधक पूरे उत्साह के साथ चल समारोह में शामिल होंगे।
शस्त्र कला के साथ दिखेगा मलखंभ का रोमांच

चल समारोह में जवाहर व्यायामशाला के साधक विभिन्न शस्त्र कलाओं का प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ ही मलखंभ के हैरतअंगेज करतब दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहेंगे। जवाहर व्यायामशाला के मलखंभ खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर व्यायामशाला का नाम रोशन किया है। ऐसे में इस वर्ष भी मलखंभ प्रदर्शन को लेकर खास उत्साह है।
झांकी में मां कालिका और रक्तबीज का प्रसंग
समारोह में शामिल झांकी को इस वर्ष पौराणिक प्रसंग पर तैयार किया जा रहा है। इसमें मां कालिका को राक्षस रक्तबीज का संहार करते हुए दर्शाया जाएगा। पौराणिक मान्यता के अनुसार रक्तबीज को ऐसा वरदान प्राप्त था कि उसके शरीर से धरती पर गिरने वाली रक्त की प्रत्येक बूंद से उसके जैसा एक और राक्षस उत्पन्न हो जाता था। इसी कारण उसका वध देवी काली ने किया था। इसी प्रसंग को झांकी के माध्यम से जीवंत रूप देने की तैयारी अंतिम दौर में की जा रही है।
अंतिम दौर में झांकी की साज-सज्जा
चल समारोह को आकर्षक बनाने के लिए झांकी की साज-सज्जा और अंतिम तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। अनंत चतुर्दशी की रात जब झिलमिल रोशनी से सजी झांकी के साथ पहलवान और शरीर साधक सड़कों पर उतरेंगे, तब शहर में पारंपरिक अखाड़ा संस्कृति, शस्त्र कला और मलखंभ का रोमांच एक साथ देखने को मिलेगा।
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