
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। “खून लगी लकड़ी वैवाहिक और सामान्य घरेलू कार्यों में उपयोग नहीं होती।” इसी महत्वपूर्ण टिप्पणी के साथ Ratlam न्यायाधीश ने वर्ष 2020 के चर्चित हत्या प्रकरण में आरोपी जीवणा (52) पिता कमजी पारगी निवासी ग्राम मातर (थाना सरवन) को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई।
Ratlam कोर्ट ने फैसले में स्पष्ट कहा कि घटना में प्रयुक्त लकड़ी पर मृतक का डीएनए मिलना हत्या का मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण है और इसे सामान्य घरेलू उपयोग की वस्तु बताकर आरोपी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता।

2020 में हुई थी जीवला उर्फ जीवा की हत्या
अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता समरथ पाटीदार के अनुसार, थाना सरवन में 20 दिसंबर 2020 को फरियादी महिपाल ने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। रिपोर्ट में बताया था कि सुबह सूचना मिली कि उसके पिता जीवला उर्फ जीवा आरोपी जीवणा के घर के आंगन में खून से लथपथ पड़े हैं। मौके पर पहुंचने पर उनके सिर के पीछे गंभीर चोट और खून बहता मिला तथा उनकी मृत्यु हो चुकी थी।
जीवणा मुझे मत मार…
जांच के दौरान पड़ोसी गवाहों ने बताया कि घटना से पहले आरोपी जीवणा का परिवारजनों से विवाद हुआ था। उसी दौरान मृतक जीवला वहां मौजूद था और बाद में घर के आंगन में खाट पर सो गया था। देर रात मृतक की आवाज सुनाई दी थी — “जीवणा मुझे मत मार, मेरे से उठते भी नहीं बन रहा है।”
डीएनए जांच बनी फैसले का अहम आधार
पुलिस विवेचना के दौरान आरोपी की गिरफ्तारी कर घटना में प्रयुक्त खाखरे का लकड़ा बरामद किया गया। वैज्ञानिक जांच में लकड़ी पर खून पाया गया और एफएसएल जांच में उस पर मृतक जीवला का डीएनए प्रोफाइल मिला। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि बरामद लकड़ी सामान्य रूप से खाना बनाने या जलाने के काम आने वाली वस्तु है। हालांकि न्यायालय ने इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि खून से सना लकड़ा सामान्य, वैवाहिक या घरेलू उपयोग की वस्तु नहीं माना जा सकता, इसलिए आरोपी का बचाव स्वीकार्य नहीं है।
कोर्ट ने एक्सीडेंट थ्योरी भी खारिज की
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के सिर, हाथ, कोहनी और पैरों पर गंभीर चोटें पाई गईं। आरोपी पक्ष ने मृत्यु को अंधेरे में पथरीले रास्ते पर गिरने या दुर्घटना का परिणाम बताने का प्रयास किया, लेकिन न्यायालय ने मेडिकल साक्ष्यों के आधार पर इस तर्क को भी अस्वीकार कर दिया।
धारा 302 में उम्रकैद, जमानत निरस्त कर भेजा जेल
न्यायालय ने गुण-दोष के आधार पर आरोपी जीवणा पारगी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 3 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। घटना के समय आरोपी जमानत पर था, लेकिन सजा सुनाए जाने के बाद न्यायालय ने उसकी जमानत समाप्त कर तत्काल जेल भेजने के आदेश दिए। प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता समरथ पाटीदार ने की।
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