
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। रतलाम नगर निगम (Ratlam Municipal Corporation) के अफसरों की मनमानी कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। दो करोड़ रुपये की लागत से बने कुशाभाऊ ठाकरे स्विमिंग पूल को मात्र 12 हजार 666 रुपये मासिक किराये पर निजी हाथों को सौंपने के मामले की जांच में जुटे उज्जैन आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने अब उपायुक्त करुणेश दंडोतिया के बयान दर्ज किए हैं। उपायुक्त दंडोतिया लंबे समय से नोटिस मिलने के बावजूद उज्जैन आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में हाजिर होने से बच रहे थे।

जानकारी के अनुसार कुशाभाऊ ठाकरे स्विमिंग पूल को ठेकेदार के निजी हाथों में सौंपने के मामले में पूर्व आयुक्त हिमांशु भट्ट की भूमिका भी जांच के दायरे में है। जल्द ही मामले की अंतिम स्तर पर जांच पूरी होकर सख्त कार्रवाई की संभावना है।

EOW की जांच के दायरे में अब पूर्व आयुक्त हिमांशु भट्ट, जलप्रदाय प्रभारी राहुल जाखड़, तथा पूल को ठेके पर सौंपने वाली टेंडर कमेटी के सभी सदस्य भी आ चुके हैं। जल्दी ही अन्य जिम्मेदारों को भी पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। निगम पूरे प्रकरण में इसलिए भी शिकंजे में फंस चुकी है कि रतलाम नगर निगम (Ratlam Municipal Corporation) अब खुद सरकारी संपत्तियों को कौड़ियों के दाम पर निजी हाथों में सौंपने के आरोप है। कुशाभाऊ ठाकरे स्विमिंग पूल को महज 1.52 लाख रुपये वार्षिक दर पर दिल्ली की रामकृष्ण इंटरप्राइजेस को मार्च 2025 में ठेके पर दिया गया था।सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि परिषद के जनप्रतिनिधि पूरे मामले पर चुप्पी साधे बैठे रहे हैं, जो इस बात की ओर इशारा करता है कि यह घोटाला केवल अधिकारियों का नहीं, बल्कि राजनीतिक संरक्षण प्राप्त मिलीभगत का नतीजा है।
दिखावे के लिए अपनाई थी टेंडर प्रक्रिया
सूत्रों की मानें तो केवल दिखावे की निविदा प्रक्रिया अपनाई गई थी। प्रक्रिया में दो टेंडर आए, जिसमें से एक को तकनीकी खामियों का हवाला देकर बाहर कर दिया गया और दूसरा ठेका बिना प्रतिस्पर्धा के न्यूनतम दर पर सौंप दिया गया। इस पूरे मामले वंदेमातरम् NEWS ने प्रमुखता से उठाया था, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी जवाब देने से अब तक कतरा रहे हैं। कोई स्वास्थ्य विभाग को ज़िम्मेदार ठहराता है तो कोई खुद को अधिकारहीन बताकर जांच को प्रभावित करने की कोशिश में है।
रतलाम निगम नहीं कर रही सहयोग
रतलाम के कुशाभाऊ ठाकरे स्विमिंग पूल को कम दर पर ठेकेदार को सौंपने के मामले में जांच जारी है। जांच में विलंब का प्रमुख कारण रतलाम निगम के अधिकारियों का समय पर सहयोग नहीं मिलना है। प्रकरण में शेष जांच अंतिम दौर में है। जल्द पूरी जांच कर आगामी कार्रवाई की जाएगी। – रामनिवास यादव, जांचकर्ता अधिकारी (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो उज्जैन)
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