


रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। मध्य प्रदेश के रतलाम (Ratlam) जिले में प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिरों की जमीन को अवैध कब्जों से मुक्त कराने, निजी देवस्थलों की अलग सूची तैयार करने और पुजारियों के पारंपरिक अधिकारों को सुरक्षित करने की मांग को लेकर राष्ट्रीय मठ मंदिर संघ ने आवाज बुलंद की है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शासन-प्रशासन ने मंदिरों की भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए ठोस कार्रवाई नहीं की, तो संघ स्वयं मैदान में उतरकर अतिक्रमण हटाने के लिए आंदोलन करेगा।
शुक्रवार को आयोजित प्रेसवार्ता में राष्ट्रीय मठ मंदिर संघ के प्रदेश अध्यक्ष रघुदास बैरागी ने कहा कि मंदिरों की संपत्तियों की सुरक्षा, पुजारियों के अधिकारों और देवस्थानों की भूमि से जुड़े मुद्दों को लेकर शासन का ध्यान कई बार आकर्षित कराया जा चुका है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार और कलेक्टर के आदेशों के बाद भी एसडीएम और तहसीलदार स्तर पर कई मामलों में कार्रवाई नहीं होने से मंदिरों की संपत्तियों पर अवैध कब्जे बने हुए हैं।
मंदिरों की जमीन से कब्जे हटाकर पुजारियों को मिले अधिकार
संघ ने मांग की कि मंदिरों की कृषि एवं गैर-कृषि भूमि पर किए गए अवैध कब्जों को हटाकर मूल पुजारियों और सेवादारों को उनके वैधानिक अधिकार दिलाए जाएं। मंदिरों की भूमि पर अनधिकृत कब्जा करने वालों और कथित भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। संघ का कहना है कि मंदिरों की संपत्तियों की रक्षा के साथ उनसे जुड़े पुजारियों और सेवादारों के पारंपरिक एवं कानूनी अधिकारों का संरक्षण भी जरूरी है।
निजी देवस्थलों की अलग सूची बनाने की मांग
राष्ट्रीय मठ मंदिर संघ ने मध्यप्रदेश शासन के वर्ष 2008 के आदेशों और न्यायालयीन निर्णयों का हवाला देते हुए निजी देवस्थलों की अलग सूची तैयार करने की मांग की। संघ के अनुसार, निजी देवस्थलों के मामलों में पुजारियों के वैधानिक एवं वंशानुगत अधिकारों को राजस्व अभिलेखों में विधिवत दर्ज किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में भूमि संबंधी विवादों से बचा जा सके। संघ ने यह भी मांग की कि निजी देवस्थलों पर शासकीय मंदिरों के लिए निर्धारित नियमों को बिना उचित आधार के लागू नहीं किया जाए। निजी और शासकीय मंदिरों की स्थिति स्पष्ट होने से संपत्तियों के प्रबंधन और अधिकारों से जुड़े विवादों का समाधान करने में मदद मिलेगी।
पुराने राजस्व रिकॉर्ड से हो मंदिरों की जमीन की जांच
संघ ने मंदिरों की भूमि और संपत्तियों का पुराने राजस्व अभिलेखों के आधार पर सर्वेक्षण कराने की मांग की। संघ के अनुसार, जिन मामलों में मंदिरों की जमीन को गैरकानूनी तरीके से बेचे जाने या उस पर अवैध कब्जा किए जाने की शिकायतें हैं, उनकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। संघ ने मंदिरों की संपत्तियों की सुरक्षा के लिए नियमित समीक्षा व्यवस्था लागू करने तथा अनधिकृत कब्जों को हटाने पर जोर दिया। साथ ही, यदि जांच में मंदिरों की भूमि का अवैध हस्तांतरण सामने आता है, तो नियमानुसार जमीन वापस देवस्थानों के नाम कराने की कार्रवाई की जाए।
पुजारियों को मिले किसान क्रेडिट कार्ड और सरकारी योजनाओं का लाभ
संघ ने कहा कि मंदिरों की भूमि पर निर्भर पुजारियों को भी शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए। पात्र पुजारियों को मंदिर की कृषि भूमि के संबंध में नियमानुसार किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई। संघ का कहना है कि पुजारी और सेवादार लंबे समय से मंदिरों की पूजा-अर्चना, देखरेख और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रहे हैं। ऐसे में उनके अधिकारों और आजीविका से जुड़े मुद्दों पर शासन को संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए।
मंदिरों की संपत्ति बिक्री रोकने पर भी जोर
राष्ट्रीय मठ मंदिर संघ ने निजी मंदिरों की जमीन की अनावश्यक एवं अनाधिकृत बिक्री पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की। संघ के अनुसार, देवस्थलों की संपत्तियों का संरक्षण आवश्यक है, ताकि धार्मिक परंपराएं सुरक्षित रहें और मंदिरों की भूमि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप हो सके। प्रेसवार्ता में संघ ने स्पष्ट किया कि मंदिरों की जमीन से अतिक्रमण हटाने, निजी देवस्थलों की स्थिति स्पष्ट करने और पुजारियों को उनके अधिकार दिलाने के लिए शासन-प्रशासन को ठोस कदम उठाने चाहिए। मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में संघ ने आंदोलन का रास्ता अपनाने की चेतावनी दी।इस अवसर पर अखिल भारतीय पुजारी संघ के अध्यक्ष महेंद्र शर्मा, महेंद्रदास बैरागी सहित पुजारी संघ के अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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