
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। मध्य प्रदेश के रतलाम (Ratlam) कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब नगरा गांव के 65 वर्षीय किसान प्यार सिंह ने जिला प्रशासन की उदासीनता से परेशान होकर अपने ऊपर पेट्रोल छिड़क लिया।होमगार्ड जवानों ने वृद्ध किसान के हाथ से पेट्रोल की बोतल छीन ली और बड़ा हादसा टल गया।
किसान का आरोप है कि रासायनिक दवा के इस्तेमाल से उसकी लहसुन और प्याज की फसल बर्बाद हो गई थी, लेकिन तीन साल से शिकायतों और जनसुनवाई के चक्कर लगाने के बावजूद उसे न तो मुआवजा मिला और न ही जांच रिपोर्ट।

वर्षों से वृद्ध किसान दफ्तरों के काट रहा चक्कर
घटना के दौरान भावुक किसान प्यार सिंह ने रोते हुए कहा कि वह वर्षों से न्याय की उम्मीद में अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, लेकिन उसकी कहीं सुनवाई नहीं हुई। उसने बताया कि खराब फसल के नमूने अधिकारी जांच के लिए ले गए थे, मगर आज तक लैब रिपोर्ट सामने नहीं आई।
जनसुनवाई समाप्ति के बाद पहुंचे थे किसान
जानकारी के अनुसार, जनसुनवाई में रतलाम कलेक्टर मिशा सिंह (Ratlam Collector Misha Singh), अपर कलेक्टर डॉ. शालिनी श्रीवास्तव और जिला पंचायत सीईओ वैशाली जैन सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। दोपहर में जनसुनवाई का समय समाप्त होने के बाद किसान प्यार सिंह वहां पहुंचे। बताया जा रहा है कि एडीएम ने उन्हें चैंबर में आने को कहा था, लेकिन उनके बाहर निकलते ही किसान ने आत्महत्या की चेतावनी देते हुए थैले से पेट्रोल की बोतल निकालकर अपने ऊपर उंडेल ली। मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल हस्तक्षेप कर स्थिति संभाली।
रासायनिक दवा से फसल बर्बादी का दावा
किसान ने अफसरों को बताया कि वर्ष 2023 में उसने ग्रामोफोन कंपनी से कृषि रासायनिक दवा खरीदी थी। उसके उपयोग के बाद उसकी लहसुन और प्याज की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। शिकायत के बाद कृषि विभाग की टीम खेत पर पहुंची, निरीक्षण किया और फसल के नमूने भी लिए गए, लेकिन अब तक जांच रिपोर्ट नहीं दी गई। वृद्ध किसान के अनुसार, लैब रिपोर्ट नहीं मिलने से उसका मामला उपभोक्ता फोरम में भी अटका हुआ है।
किसान ने लगाए सिस्टम पर गंभीर आरोप
प्यार सिंह ने दावा किया कि उसने उपभोक्ता फोरम में मामला दायर किया है, जहां सुनवाई के दौरान लैब जांच रिपोर्ट मांगी गई। किसान का आरोप है कि संबंधित कंपनी ने जांच के लिए लिए गए नमूनों को प्रभावित कर दिया, जिसके कारण उसे हाईकोर्ट जाने की सलाह दी गई। उसने यह भी आरोप लगाया कि खेत निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारियों ने नष्ट फसल के नमूनों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित नहीं की।
चौपट फसल से जमीन और ट्रैक्टर तक गंवाया
वृद्ध किसान के मुताबिक उसने ढाई बीघा में लहसुन और दो बीघा में प्याज की खेती की थी। फसल खराब होने से उसे लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। आर्थिक तंगी इतनी बढ़ी कि जमीन बेचनी पड़ी और ट्रैक्टर कंपनी वाहन भी जब्त कर ले गई। उन्होंने कहा कि न्याय की तलाश में उसके “जूते घिस गए”, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
प्रशासन का पक्ष : फोरम में सुनवाई जारी
अपर कलेक्टर डॉ. शालिनी श्रीवास्तव ने कहा कि घटना के समय जनसुनवाई समाप्त हो चुकी थी और अधिकांश अधिकारी जा चुके थे। किसान के पहुंचने पर उन्हें चैंबर में बुलाया गया था। उन्होंने बताया कि मामला प्राकृतिक आपदा से जुड़ा नहीं है, इसलिए राहत राशि का प्रावधान लागू नहीं होता। चूंकि किसान ने उपभोक्ता फोरम में वाद दायर कर रखा है, इसलिए आगे की कार्रवाई संबंधित मंच पर ही होगी।
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