– स्वयंसेवक संघ के विभाग संघ चालक ने रतलाम में दिया संबोधन
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। भारत पर प्रथम आक्रमण के समय से ही जनजाति योद्धाओं ने आक्रमणकारियों का पुरजोर विरोध किया। सिकंदर के आक्रमण के समय मालव गणराज्य के जनजाति योद्धाओं ने सिकंदर को उल्टे पांव वापस भेज दिया था। राणा पूंजा, रानी दुर्गावती, टंट्या मामा, तिलका मांझी या भगवान बिरसा मुंडा का देश की रक्षा में अमूल्य योगदान है। राष्ट्र की माृतभूमि की रक्षा के लिए कौने-कौने से जनजाति योद्धाओं ने राष्ट्र की रक्षा के लिए अनेक युद्ध लड़े। आज भी जनजाति समाज भारत को समृद्ध राष्ट्र बनाने के लिए जी-जान से लगा हुआ है।
उक्त संबोधन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग संघ चालक तेजराम मंगरोदा ने रतलाम में कही। वह जनजाति विकास मंच द्वारा आयोजित संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। गीता मंदिर रोड स्थित रंगोली सभागृह में आयोजित संगोष्ठी जनजाति विकास मंच रतलाम द्वारा आयोजित की गई थी। स्वतंत्रता में जनजाति समाज का योगदान विषय को लेकर आयोजित संगोष्ठी के दौरान राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों ने जनजाति समाज द्वारा राष्ट्र की आजादी से लेकर अब तक दिए जा रहे योगदान का स्मरण भी कराया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. रूपचंद मईड़ा ने की। संगोष्ठी में मुख्य रूप से रतलाम ग्रामीण विधायक मथुरालाल डामर, पूर्व विधायक दिलीप मकवाना, पूर्व विधायक संगीता चारेल, सैलाना जनपद अध्यक्ष कैलाशी बाई चारेल सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक मौजूद थे। संगोष्ठी की अध्यता कर रहे डॉ. मईड़ा ने भी जनजाति समाज के उत्थान पर प्रकाश डाला। अंत में आभार रतन जी ने माना।
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