– आखिर किस मंच से पूर्व संपादक ने कही यह बड़ी बात, पढ़े विस्तृत समाचार
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज।
चिंता की बात यह नहीं कि राजनीतिक बहस से बौखलाए एक आरपीएफ कर्मी चलती ट्रेन में तीन लोगों को मौत के घाट उतार देता है। चिंता की बात यह भी नहीं कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए खतरे की घंटी है। चिंताजनक यह है कि इस घटना के बाद अभी तक रेलमंत्री अश्विन वैष्णव ने घटना को लेकर निंदा नहीं की है और न रोज रेलयात्रा करने वाले एक करोड़ से अधिक भारतियों को सुरक्षा का भरोसा दिलाया।
उक्त चिंता पाक्षिक पत्रिका के पूर्व संपादक जसविंदर सिंह ने रतलाम में आयोजित मंच से जाहिर की। पूर्व संपादक सिंह शैलेंद्र शैली स्मृति व्याख्यान में मुख्यवक्ता के रूप में मौजूद थे। अध्यक्षता कांतिलाल निनामा ने की। मुख्यवक्ता सिंह ने कहा कि अनेकता में एकता का नारा हमारे आजादी के सौ साल के संघर्षों के अनुभव का परिणाम है। मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार धर्म निरपेक्ष और संघीय ढांचे के लिए ही सुखद कार्य नहीं कर रही है। मणिपुर की अमानवीय और हृदयविदारक घटनाओं के बाद भी प्रधानमंत्री और पक्ष खमोश है।
पूर्व संपादक सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की तल्ख टिप्पणी भी जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली को लचर दर्शा रहा है। हरियाणा में एक फरार अपराधी का आपत्तिजनक वीडियो वायरल होता है, वह संवेदनशील स्थानों से उत्तेजक नारे लगाते हुए रैली निकालता है और हरियाणा सरकार और प्रशासन यह सब होने देता है। पूर्व संपादक सिंह का गभीर आरोप यह भी है कि जब यह चल रहा है तभी सरकार संसद में कानून पास करती है कि नकली दवा बनाने वालों को जेल नहीं होगी। इससे साफ है कि धर्म के नाम पर चलने वाली सरकार असल में मिलावटखोरों की सरकार है। उन्होंने इसके खिलाफ जनता को जागृत करने की अपील की। व्याख्यान माला को रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. रतन चौहान ने भी संबोधित कर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं पर खतरों का जिक्र करते हुए कहा कि यह समय उठ खड़े होने का है। उन्होंने मंच से कविता के माध्यम से अपनी बात कही। व्याख्यान माला की शुरुआत मांगीलाल नागावत ने की। संचालन अश्विन शर्मा ने किया एवं आभार रंजीतसिंह राठौड़ ने माना।
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