
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। रतलाम (Ratlam) के कोमल नगर और प्रोफेसर कॉलोनी के बीच स्थित सार्वजनिक मार्ग पर अवैध कब्जे को लेकर भले ही रतलाम निगम ने कोर्ट के आदेश पर अवैध अतिक्रमण हटाना स्वीकार किया हो लेकिन यह विवाद लगातार गहराता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों और पीड़ित पक्षों का आरोप है कि न्यायालय के आदेश, सीमांकन रिपोर्ट और उपलब्ध दस्तावेजों के बावजूद रतलाम प्रशासन द्वारा अब तक सार्वजनिक मार्ग को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया और अवैध ओटले को नहीं हटाया है। मामले में राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक निष्क्रियता के भी गंभीर आरोप लग चुके हैं। पीड़ित पक्ष अब संबंधित अफसरों के खिलाफ न्यायालय अवमानना (कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट) याचिका दायर करने की तैयारी कर चुका है।
कोर्ट ने रास्ते में बाधा नहीं डालने के दिए थे स्पष्ट निर्देश
विवादित मार्ग को लेकर रतलाम (Ratlam) अष्टम जिला न्यायाधीश द्वारा 9 मई 2025 को पारित आदेश में स्पष्ट किया था कि शुभ लग्न बैंक्वेट हॉल के उत्तर दिशा में स्थित सार्वजनिक मार्ग पर कोई भी पक्षकार बाधा उत्पन्न नहीं करेगा। न्यायालय ने सीमांकन रिपोर्ट और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर मार्ग के अस्तित्व को स्वीकार करते हुए उस पर अवरोध खड़ा करने पर रोक लगाई थी। मामले की शुरुआत उस समय हुई जब 2 जुलाई 2024 को बैंक्वेट हॉल और प्रिंस पैलेस के सामने स्थित क्षेत्र में निर्मित सीमेंट-कंक्रीट बाउंड्रीवाल को लेकर विवाद खड़ा हुआ। इस संबंध में विजय शंकर पांडेय द्वारा नगर निगम और अन्य पक्षों के खिलाफ कोर्ट की शरण ली थी।

सीमांकन रिपोर्ट में सार्वजनिक मार्ग होने का दावा
कोर्ट के निर्देश पर कराए गए सीमांकन में यह तथ्य सामने आने का दावा किया गया कि विवादित क्षेत्र में स्थित मार्ग कोमल नगर के स्वीकृत लेआउट का हिस्सा है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार जिस स्थान को बगीचा बताकर बंद किया गया, वह वास्तव में सार्वजनिक उपयोग का रास्ता है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि सर्वे नंबर 192/2 से जुड़े क्षेत्र में निर्मित बगीचे का कुछ हिस्सा निजी भूमि सर्वे नंबर 191 पर नियम विपरीत निर्माण किया है। इस आधार पर अवैध कब्जे और भूमि उपयोग को लेकर भी रतलाम (Ratlam) निगम के पूर्व आयुक्त सहित इंजीनियर पर गंभीर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं।
फिज़ा बिगाड़ने की धमकी और अफसरों की मौजूदगी में अवैध कब्जा
बता दें कि 11 जनवरी 2026 को कुछ लोगों द्वारा अवैध निर्माण हटाया था। इसके बाद मौके पर अवैध निर्माण तोड़ने के विरोध में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष बजरंग पुरोहित ने शहर की फिजा बिगाड़ने की खुलेआम धमकी दी थी। रतलाम-बांसवाड़ा रोड पर चक्काजाम कर राहगीरों को परेशान भी किया गया था। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में विवादित स्थल पर कोर्ट के स्पष्ट आदेश के विपरीत विजय पाटीदार, विक्रम गोस्वामी, हितेन्द्र पाटीदार, पार्षद पप्पू पुरोहित सहित भाजपा के कुछ नेताओं ने ओटले का और रास्ते पर अवैध दीवार का निर्माण कराया था। शिकायतकर्ताओं ने मामले में कुछ राजनीतिक नेताओं पर भी मामले में हस्तक्षेप करने और अधिकारियों पर दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
अवैध कब्जा करने वालों पर नहीं हुई कार्रवाई
प्रिंस होटल संचालक और अन्य प्रभावित पक्षों का कहना है कि सड़क जाम और हंगामे में शामिल लोगों के खिलाफ अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जबकि अवैध निर्माण हटाने का विरोध करने वाले पक्षों पर एफआईआर दर्ज कर दी गई। हाल ही में सुभाष सिंह और विजय शंकर पांडेय ने रतलाम एसपी अमित कुमार को शिकायत सौंपकर आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव में एकतरफा कार्रवाई की गई। उन्होंने दर्ज प्रकरणों की निष्पक्ष जांच और कथित अवैध कब्जाधारियों व चक्काजाम करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रमुखता से मांग की है।
प्रोफेसर कॉलोनी के वैधानिक दर्जे पर भी उठे प्रश्न
स्थानीय नागरिकों का दावा है कि प्रोफेसर कॉलोनी का हस्तांतरण अब तक विधिवत रूप से रतलाम नगर निगम को नहीं हुआ है। इसके बावजूद वहां विकास कार्य और बाउंड्रीवाल निर्माण किए जाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि कॉलोनी का अधिग्रहण या हस्तांतरण पूर्ण नहीं हुआ है, तो सार्वजनिक भूमि या मार्ग पर निर्माण कार्य की वैधानिकता की उच्च स्तरीय जांच के साथ दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई आवश्यक है।
हाईकोर्ट के आदेशों के पालन को लेकर भी विवाद
प्रभावित पक्षों के अनुसार रास्ता बंद होने से व्यवसायिक गतिविधियां प्रभावित हुईं, जिसके बाद प्रिंस होटल और डॉल्फिन स्विमिंग पूल संचालकों ने न्यायालय का रुख किया। उनका दावा है कि हाईकोर्ट स्तर पर भी सार्वजनिक मार्ग को बंद कर अवैध ओटला अवरोध हटाने संबंधी निर्देश दिए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक पालन नहीं हुआ। विवादित स्थल पर सीवरेज लाइन के ऊपर अवैध चबूतरा बनाए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस निर्माण के लिए किसी प्रकार की वैधानिक अनुमति नहीं ली गई। उन्होंने सार्वजनिक स्थलों पर अवैध धार्मिक निर्माण रोकने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए मामले में कार्रवाई की मांग की है।
नगर निगम रिकॉर्ड और विकास कार्यों पर भी सवाल
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि विवादित बगीचे और उससे संबंधित बाउंड्रीवाल का स्पष्ट रिकॉर्ड नगर निगम के पास उपलब्ध नहीं है। साथ ही क्षेत्र में कराए गए कुछ निर्माण कार्यों और व्यय से जुड़े अभिलेखों पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसी आधार पर मामले में आर्थिक अनियमितताओं की जांच लोकायुक्त या आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) से कराने की मांग की जा रही है।
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