
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। मध्य प्रदेश के रतलाम (Ratlam) जिले के पलसोड़ी क्षेत्र में शुक्रवार को अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासनिक और पुलिस टीम को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। कार्रवाई के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और कुछ लोगों ने पुलिस तथा प्रशासनिक अमले पर पथराव शुरू कर दिया। इस घटना में एक महिला पुलिसकर्मी का सिर फट गया, जबकि तीन अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हो गए।
हालात बिगड़ते देख पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया और आंसू गैस के गोले छोड़कर लोगों को मौके से खदेड़ा। फिलहाल क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात है और घायल पुलिसकर्मियों को अस्पताल पहुंचाया गया।
सुबह शुरू हुई कार्रवाई, हिरासत के बाद बढ़ा तनाव
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे Ratlam प्रशासनिक अधिकारी भारी पुलिस बल और मशीनरी के साथ पलसोड़ी पहुंचे थे। टीम के साथ जेसीबी, पोकलेन मशीनें, डंपर और अन्य उपकरण मौजूद थे। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू होते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। अधिकारियों ने पहले ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद पुलिस ने विरोध कर रहे 15 से 20 लोगों को हिरासत में लिया। इसी दौरान तनाव बढ़ गया और कुछ लोगों ने पथराव शुरू कर दिया।
पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में चल रही थी कार्रवाई

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान रतलाम (Ratlam) शहर एसडीएम आर्ची हरित, तहसीलदार ऋषभ ठाकुर, आरआई विक्की ठाकुर और 10 पटवारी मौके पर मौजूद थे। सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी सीएसपी सत्येंद्र घनघोरिया संभाल रहे थे। मौके पर औद्योगिक क्षेत्र थाना प्रभारी गायत्री सोनी, डीडी नगर थाना प्रभारी अनुराग यादव, माणक चौक थाना प्रभारी विक्रम सिंह चौहान समेत करीब 100 पुलिसकर्मी तैनात थे। मौके पर किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पहले से फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और वज्र वाहन भी मौजूद थे।
निवेश क्षेत्र को लेकर लंबे समय से जारी है विरोध
रतलाम (Ratlam) जिले के समीपस्थ ग्राम पलसोड़ी और आसपास के चार-पांच गांवों की करीब 1700 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित निवेश क्षेत्र में शामिल है। ग्रामीण लंबे समय से इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे उनकी कृषि भूमि और आवासीय क्षेत्र प्रभावित होंगे तथा बड़ी संख्या में लोगों को विस्थापन का सामना करना पड़ सकता है। वहीं प्रशासन का कहना है कि यह परियोजना क्षेत्र के औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण है।
अप्रैल में भी हुआ था बड़ा आंदोलन
निवेश क्षेत्र के विरोध में अप्रैल माह में भी बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस आंदोलन को बीएपी पार्टी, जयस और विभिन्न आदिवासी संगठनों का समर्थन मिला था। सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार भी ग्रामीणों के साथ धरने में शामिल हुए थे। धरने में जिला पंचायत उपाध्यक्ष केशुराम निनामा, कांग्रेस नेता लक्ष्मण सिंह डिंडोर, पलसोड़ी ग्राम पंचायत के सरपंच पति गोरधन बोरासी और जुलवानिया के सरपंच छोटू भाबर सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे थे।
विधायक ने लगाया था आदिवासी विस्थापन का आरोप
धरने के दौरान विधायक कमलेश्वर डोडियार ने प्रस्तावित निवेश क्षेत्र को आदिवासी परिवारों के विस्थापन की योजना बताते हुए इसका विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि आदिवासी समुदाय के अधिकारों से समझौता नहीं किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर न्यायालय का सहारा लिया जाएगा। उन्होंने ग्रामीणों से एकजुट रहकर कानूनी लड़ाई लड़ने की अपील की थी और मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष उठाने की बात भी कही थी।
पहले भी हुई थी प्रशासन और ग्रामीणों के बीच लंबी चर्चा
अप्रैल में विरोध प्रदर्शन के दौरान सैलाना एसडीएम तरुण जैन, तहसीलदार ऋषभ ठाकुर, एमपीआरडीसी के अधिकारी और पुलिस बल मौके पर पहुंचे थे। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की आपत्तियां सुनने के लिए अधिकारियों को जमीन पर बैठकर चर्चा करनी पड़ी थी। हालांकि कई घंटों की बातचीत के बावजूद कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी थी।
औद्योगिक विकास बनाम विस्थापन की चिंता
दिल्ली-मुंबई आठ लेन एक्सप्रेस-वे के निकट विकसित हो रहे इस निवेश क्षेत्र में कई कंपनियां काम शुरू कर चुकी हैं। प्रशासन इसे क्षेत्र के आर्थिक विकास और रोजगार के अवसरों से जोड़कर देख रहा है, जबकि ग्रामीणों को अपनी जमीन, घर और आजीविका पर खतरा महसूस हो रहा है। इसी विरोध और विकास की बहस के बीच शुक्रवार को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हिंसक झड़प में बदल गई, जिससे पलसोड़ी एक बार फिर प्रदेशभर में चर्चा का केंद्र बन गया।
Website Design By
KAMAKSHI WEB
CONTACT : +91-9753910111


