This is an inside story!.. : रतलाम की खाकी सीमा पार हुई बदनाम, अब सिस्टम उड़ाने लगा लोकतंत्र का मजाक, जल्द भगवा दरबार में होगी कुंडली की जांच

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ye andar kee baat hai...01
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असीम राज पांडेय, रतलाम। जिले की खाकी कभी अंतरराज्यीय गिरोहों का पीछा करते-करते दूसरे राज्यों तक सुर्खियां बटोरती थी। अब हालात ऐसे हैं कि एक वर्दीधारी ने खुद ही सीमा पार जाकर विभाग की ऐसी किरकिरी करवाई कि राजस्थान के साथ प्रदेश में सुर्खियां बंटोर रही है। पचास हजार रुपये की इस “रिश्वत की कमाई” ने प्रदेश की जीरो टॉलरेंस नीति को भी आईना दिखा दिया। मजेदार बात यह है कि यह कारनामा अचानक नहीं हुआ। रिश्वत की करतूत से रतलाम की खाकी पर दाग लगाने वाले की कार्यप्रणाली कुछ ऐसी रही कि थाने में आवेदन आते ही जांच का मीटर पांच हजार रुपये से चालू होता था। कभी जांच के नाम पर खर्चा, तो कभी एफआईआर से नाम बाहर करने का हुनर, सब कुछ खुले रहस्य जैसा था। कबाड़ बीनने वाली महिलाओं से अभद्रता और थाना परिसर में मारपीट जैसे आरोप भी काफी चर्चा में रहे, लेकिन जिम्मेदारों की नजर उस फाइल की तरह बंद रही, जिसे खोलने से असुविधा होती हो। नतीजा यह हुआ कि वर्दी कानून की नहीं, निजी जागीर की तरह इस्तेमाल होने लगी। अब सवाल यह नहीं कि एक पुलिसकर्मी पकड़ा गया, बल्कि यह है कि उसकी कारगुजारियां इतने समय तक सबकी नजरों से कैसे बचती रहीं? ये अंदर की बात है…  (This is an inside story) कि बदनामी अकेले रिश्वतखोर की नहीं, उस खामोशी की भी थी जिसने उसे बेखौफ बनाया।

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अब सिस्टम उड़ाने लगा लोकतंत्र का मजाक

लोकतंत्र में जनता और नेतृत्वकर्ता को अपनी बात कहने और सुनाने का पूरा अधिकार है। लेकिन सिस्टम के निकम्मेपन में शिकायत के बीच बैरिकेड्स और पुलिस बंदोबस्त हो, तो समझ लीजिए सिस्टम संवाद नहीं, दूरी बनाए रखने के मूड में है। रतलाम में इन दिनों कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। स्वास्थ्य, बिजली और किसानों की समस्याओं को लेकर जनप्रतिनिधि और विपक्ष अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाना चाहते थे, लेकिन व्यवस्था ने उन्हें फरियादी नहीं, मानो किसी सुरक्षा अभ्यास का हिस्सा मान लिया। चप्पे-चप्पे पर पुलिस, रास्तों पर बैरिकेड्स और ऐसा माहौल कि जैसे शिकायत नहीं, कोई बड़ा खतरा आने वाला हो। उधर जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन की फाइलें पहले ही इंतजार का लंबा उपवास कर रही हैं। ऐसे में जनता की समस्याओं पर विपक्ष के नेताओं ने सोचा कि सीधे अफसरों से बात कर ली जाए, मगर मुलाकात भी अब किसी वीआईपी पास से कम नहीं रही। रतलामी सिस्टम के हालत यह है कि अब सत्ता के जनप्रतिनिधियों को भी जमीन पर बैठकर अपनी नाराजगी जतानी पड़ रही है। ये अंदर की बात है… (This is an inside story) कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता होती है, लेकिन रतलाम में सबसे ताकतवर अब बैरिकेड्स और बंद दरवाजों के पीछे एसी चेम्बर में सुस्ताते अफसरों की दिनचर्या बन चुकी है।

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जल्द भगवा दरबार में होगी कुंडली की जांच

जिले के भगवाधारी संगठन में इन दिनों पद नहीं, प्रदर्शन की समीक्षा का मौसम चल रहा है। संगठन के वरिष्ठों तक ऐसी चर्चाएं पहुंच चुकी हैं कि कुछ पदाधिकारी सेवा से ज्यादा “सेटिंग” में व्यस्त रहे। कहीं अवैध कामों की फुसफुसाहट, कहीं जमीन के विवादों में सक्रियता और कहीं संगठन के नाम पर दबाव बनाने की शिकायतें। इन सबने शीर्ष नेतृत्व को सोचने पर मजबूर कर दिया है। 25 जून की केंद्रीय बैठक में कई चेहरों की किस्मत तय होनी थी, लेकिन बैठक टल गई। अब उम्मीद नए महीने के पहले सप्ताह पर टिकी है। माना जा रहा है कि इस बार केवल नई जिम्मेदारियां ही नहीं बांटी जाएंगी, बल्कि पुराने कामकाज की कॉपी भी जांची जाएगी। जिनकी कार्यशैली संगठन की मर्यादा से ज्यादा निजी महत्वाकांक्षाओं के इर्द-गिर्द घूमती रही, उनकी कुंडली भी खुल सकती है। संगठन ऐसे चेहरों की तलाश में है जो पद को प्रतिष्ठा नहीं, जिम्मेदारी समझें। ये अंदर की बात है…  (This is an inside story) कि इस बार परीक्षा केवल नए चेहरों की नहीं होगी, बल्कि पुराने कारनामों का रिपोर्ट कार्ड भी खुलेगा और तभी तय होगा कि भगवा सिर्फ रंग रहेगा या फिर संगठन की पहचान भी।

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Aseem Raj Pandey
Aseem Raj Pandeyhttp://www.vandematramnews.com
वर्ष-2000 से निरतंर पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विगत 22 वर्षों में चौथा संसार, साभार दर्शन, दैनिक भास्कर, नईदुनिया (जागरण) सहित अन्य समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए वर्तमान में समाचार पोर्टल वंदेमातरम् न्यूज के प्रधान संपादक की भूमिका का निर्वहन। वर्ष-2009 में मध्यप्रदेश सरकार से जिलास्तरीय अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार के अलावा रतलाम प्रेस क्लब के सक्रिय सदस्य। UID : 8570-8956-6417 Contact : +91-8109473937 E-mail : asim_kimi@yahoo.com

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