
रतलाम, वंदेमातरम् न्यूज। भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) 2012 बैच के अधिकारी अजय कटेसरिया ने मंगलवार को रतलाम (Ratlam) जिले के नए कलेक्टर के रूप में पदभार संभाल लिया। पूर्व कलेक्टर मिशा सिंह ने उन्हें कार्यभार सौंपा। पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने मीडिया से चर्चा में पारदर्शी प्रशासन, ई-फाइल व्यवस्था और शासन की प्राथमिकताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही।
हालांकि उनकी रतलाम में तैनाती के साथ ही एक बार फिर सतना का बहुचर्चित कथित सरकारी जमीन प्रकरण चर्चा में आ गया है। यही वह मामला है जिसमें शिवराज सिंह चौहान सरकार के दौरान उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू हुई थी, लेकिन बाद में डॉ. मोहन यादव सरकार के कार्यकाल में उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया।
आखिर ऐसा क्या हुआ कि जांच का निष्कर्ष बदल गया?
यह पूरा मामला फरवरी 2020 से दिसंबर 2021 के बीच अजय कटेसरिया के सतना कलेक्टर रहते हुए लिए गए कुछ राजस्व आदेशों से जुड़ा है। उस समय आरोप लगाए गए थे कि कई मामलों में सरकारी और नजूल भूमि को निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कराने संबंधी आदेश दिए गए। यह भी आरोप था कि कुछ राजस्व अभिलेखों में “शासकीय” शब्द हटाकर निजी स्वामित्व दर्ज कराया गया।मामला सामने आने के बाद तत्कालीन शिवराज सरकार ने इसे गंभीर मानते हुए दिसंबर 2021 में कटेसरिया का तबादला कर दिया और पूरे प्रकरण की विभागीय जांच के आदेश दिए।
चार प्रमुख मामलों पर उठे थे सवाल
विभागीय आरोप पत्र में चार प्रमुख मामलों का उल्लेख किया गया था—
1) चित्रकूट तहसील मझगवां क्षेत्र की लगभग 36 एकड़ सरकारी भूमि निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज करने का मामला।
2) कोलगवां क्षेत्र की नजूल भूमि निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज किए जाने का प्रकरण।
3) आरजी क्रमांक 136/1 एवं 137 की सरकारी नजूल भूमि के संबंध में पारित आदेश।
4) रघुराजनगर तहसील के सोनौरा-छतैली क्षेत्र की सरकारी भूमि के स्वामित्व परिवर्तन का मामला।
इन्हीं मामलों को आधार बनाकर विभागीय जांच प्रारंभ हुई।
पहली जांच रिपोर्ट में दोषी ठहराया गया

तत्कालीन रीवा संभागायुक्त अनिल सुचारी को पूरे मामले की जांच सौंपी गई थी। जांच के बाद भेजी गई रिपोर्ट में कटेसरिया की भूमिका पर सवाल उठाए गए और उन्हें जिम्मेदार माना गया। इसी रिपोर्ट के आधार पर सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने 30 मार्च 2022 को विभागीय आरोप पत्र जारी किया। बाद में जुलाई 2024 में अतिरिक्त आरोप भी जोड़े गए।
शिवराज सिंह चौहान ने सार्वजनिक मंच से दी थी चेतावनी
मामला उस समय और अधिक चर्चा में आया जब तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अप्रैल 2022 में चित्रकूट के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बिना नाम लिए कहा था कि सतना के पूर्व कलेक्टर द्वारा करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन निजी किए जाने की शिकायत मिली है। उन्होंने कहा था कि मामले की जांच कराई जा रही है और “बेईमानों को छोड़ा नहीं जाएगा।” मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद माना जा रहा था कि विभागीय कार्रवाई आगे बढ़ेगी।
कटेसरिया ने क्या दिया था जवाब?
विभागीय आरोप पत्र के जवाब में अजय कटेसरिया ने सभी आरोपों से इनकार किया।
उन्होंने अपने जवाब में कहा कि—
1) संबंधित आदेश उन्होंने स्वयं की विवेकाधीन शक्ति से नहीं, बल्कि राजस्व मंडल, अपर आयुक्त और अन्य सक्षम न्यायिक प्राधिकारियों के आदेशों के अनुपालन में पारित किए।
2) जहां रिकॉर्ड संशोधन हुआ, वहां वैधानिक अधिकार संबंधित राजस्व अधिकारियों के पास था।
कुछ मामलों में विधानसभा में प्रस्तुत सरकारी जानकारी में भी उनके आदेशों को सही माना गया था। उन्होंने यह भी कहा कि उनके विरुद्ध की गई प्रारंभिक टिप्पणी तथ्यों की गलत व्याख्या पर आधारित थी।
यहीं से बदली जांच की दिशा
कटेसरिया के जवाब के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने नियमानुसार पुनः रीवा संभागायुक्त कार्यालय से अभिमत मांगा। इसी बीच प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो चुका था और शिवराज सिंह चौहान के स्थान पर डॉ. मोहन यादव मुख्यमंत्री बन चुके थे। दूसरी बार भेजे गए अभिमत में रीवा संभागायुक्त कार्यालय ने कटेसरिया के स्पष्टीकरण को स्वीकार्य माना।
7 नवंबर 2025 को मिली क्लीन चिट
1) नई अभिमत रिपोर्ट के आधार पर सामान्य प्रशासन विभाग ने 7 नवंबर 2025 को अंतिम आदेश जारी करते हुए कहा कि विभागीय जांच में लगाए गए आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं।
2) इसी आदेश के साथ अजय कटेसरिया को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया।
यही बना सबसे बड़ा सवाल
पूरे मामले में सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर हुई कि—
1) एक ही प्रकरण में पहले जांच रिपोर्ट में अधिकारी को दोषी माना गया, आरोप पत्र जारी हुआ और सार्वजनिक रूप से कड़ी कार्रवाई की बात कही गई।
2) बाद में उसी प्रकरण में पुनः अभिमत आने पर विभाग ने यह निष्कर्ष निकाला कि आरोप सिद्ध नहीं होते और अधिकारी को दोषमुक्त कर दिया गया।
यही बदलाव अब प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
अब रतलाम में नई पारी पर सभी की नजर
अब अजय कटेसरिया रतलाम जिले के नए कलेक्टर के रूप में कार्यभार संभाल चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पूरी तरह पारदर्शी होगी, ई-फाइल प्रणाली को प्रभावी बनाया जाएगा और राज्य सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को गति दी जाएगी। लेकिन उनकी नई नियुक्ति के साथ सतना का पुराना प्रकरण एक बार फिर चर्चा में है। यह मामला प्रशासनिक निर्णयों, विभागीय जांच और बदलते निष्कर्षों को लेकर कई सवाल जरूर खड़े करता है। हालांकि आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार सामान्य प्रशासन विभाग उन्हें इस मामले में दोषमुक्त घोषित कर चुका है।
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